
स्टिंग में 18 से 20 करोड़ की डील की बात कर खास एजेंडे पर काम करने को तैयार दिखा भास्कर समूह
नई दिल्ली (पत्रिका न्यूज नेटवर्क)। कोबरापोस्ट ने जिस स्टिंग में दैनिक भास्कर के शीर्ष प्रबंधन को सौदेबाजी करते दिखाया है, उसके पूर्व खोजी पत्रकारिता समूह ने यह जानकारी दी थी कि उसने तमाम मीडिया हाउस के सामने भारी रकम की एवज में किस तरह के समाचार व अन्य सामग्री प्रकाशित करने की शर्तें रखी थीं। ऑपरेशन 136 नाम से ऐसे मीडिया समूहों के स्टिंग में कोबरा पोस्ट ने करोड़ों का सौदा कुछ प्रमुख शर्तों के आधार पर करने का प्रस्ताव रखा था। अखबार, वेबसाइट, टीवी, फेसबुक व अन्य समाचार इस रणनीति के तहत प्रकाशित होने थे-
सबसे पहले हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए अध्यात्म और धार्मिक प्रवचन का मुलम्मा चढ़ी सामग्री प्रकाशित करना। दूसरा, वोटर धर्म के आधार पर बंट जाएं इसके लिए अभियान। इसके तहत हिंदुवादी नेताओं के भाषणों को बढ़ावा ताकि सांप्रदायिक आधार पर मतदाता जुट जाएं। तीसरे चरण में चुनाव करीब आते ही सत्ताधारी पार्टी के राजनीतिक विरोधियों पर सीधा निशाना। राहुल गांधी, मायावती और अखिलेश यादव जैसे नेताओं को पप्पू, बुआ और बबुआ बताकर ऐसी सामग्री प्रकाशित करना जिससे चुनाव में उनका मखौल उड़ाने लगे और वोटर्स को अपने पक्ष में करे।
करोड़ों रुपए की डील में शर्त थी कि यह अभियान उनको अपने अखबार, रेडियो, वेबसाइट, फेसबुक और ट्विटर पर भी चलाना होगा। कोबरापोस्ट के अनुसार, इस एजेंडे पर उसने स्टिंग के तहत जिन मीडिया संस्थानों से संपर्क साधा, लगभग सभी ने यह अभियान चलाने पर सहमति दिखाई।
चार माह पहले ही जनता को पता चल जाती हकीकत
को बरापोस्ट ने ‘ऑपरेशन 136’ का पहला भाग इस साल 26 मार्च को जारी किया था, जिसमें 16 मीडिया संस्थानों के नाम सामने आए थे। इस ऑपरेशन का दूसरा भाग 25 मई, 2018 को सामने आया, जिसमें दैनिक भास्कर वाला स्टिंग भी शामिल था, लेकिन भास्कर ने 24 मई को कोर्ट से स्टे ले लिया था, अब हाईकोर्ट ने स्टे हटा लिया। जिससे चार माह बाद भास्कर की यह हकीकत जनता की अदालत में आ पाई।
भास्कर से यह बताकर मिला था कोबरापोस्ट का अंडरकवर रिपोर्टर
को बरापोस्ट के लिए पूरी तहकीकात पत्रकार पुष्प शर्मा ने श्रीमद् भगवत् गीता प्रचार समिति, उज्जैन का प्रचारक बनकर और खुद का नाम आचार्य छत्रपाल अटल बताकर की। कुछ अन्य मीडिया हाउस के ऑपरेशन में पत्रकार ने खुद को सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई का भी अध्यक्ष बताया था। स्टिंग के लिए गुप्त कैमरों का प्रयोग किया गया था।
... और देखिए कैसे बदनाम हो रहा मीडिया
कोबरापोस्ट ने इस पूरी तहकीकात को ‘ऑपरेशन 136’ नाम इसलिए दिया क्योंकि वर्ष 2017 के प्रेस इंडेक्स में भारत विश्व में 136वें पायदान पर है। कोबरापोस्ट के मीडिया समूहों के स्टिंग में ऐसे प्रसंग भी हैं कि कुछ मीडियाकर्मी दूसरे संस्थानों में भी ऐसी सामग्री के लिए पूरा मीडिया प्रबंधन करने की पेशकश करते हैं। मीडिया संस्थान राहुल गांधी जैसे नेताओं की ‘चरित्र हत्या’ करने के लिए खास सामग्री तैयार करने को भी राजी हो गए।
Updated on:
30 Sept 2018 11:38 am
Published on:
30 Sept 2018 11:25 am
