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‘3 साल की बच्ची है, सारी बातें नहीं बता सकती’, दुष्कर्म मामले में हाई कोर्ट ने रद्द की महिला टीचर की जमानत

Delhi school case: दिल्ली हाई कोर्ट ने जनकपुरी स्कूल मामले में आरोपी शिक्षिका की जमानत रद्द कर दी है। जज ने तीन दिन में सरेंडर करने का आदेश देते हुए कहा कि बच्चों से जुड़े यौन अपराध मामलों में विशेष सतर्कता जरूरी है।
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Delhi High Court on Delhi school POCSO case

दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस सौरभ बनर्जी ने रद्द की शिक्षिका की बेल (Photo: Delhi High Court/AI)

Janakpuri school case: देश की राजधानी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक प्राइवेट स्कूल के अंदर 3 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उस महिला शिक्षिका की जमानत को रद्द कर दिया है, जिस पर स्कूल स्टाफ द्वारा किए गए इस घिनौने अपराध को छिपाने का आरोप है। हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी शिक्षिका को तीन दिनों के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।

जस्टिस सौरभ बनर्जी ने दिल्ली पुलिस की उस अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा 20 मई को शिक्षिका को दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी। शिक्षिका पर आरोप है कि उसने स्कूल के एक कर्मचारी द्वारा तीन साल की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म की घटना की जानकारी छिपाई थी।

हाईकोर्ट बोला- 3 साल की बच्ची से हर डिटेल की उम्मीद नहीं कर सकते

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केवल इस आधार पर जमानत दे दी कि पीड़िता ने अपनी शुरुआती शिकायत में शिक्षिका का नाम नहीं लिया था, जो सही नहीं था।

अदालत ने कहा, तीन साल की बच्ची से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पहली शिकायत में ही घटना का हर विवरण बता दे। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने इस अहम तथ्य को नजरअंदाज कर दिया कि बच्ची ने बाद में अपनी मां की मौजूदगी में न केवल शिक्षिका की पहचान की, बल्कि उस जगह की भी पहचान की, जहां कथित घटना हुई थी।

केयरटेकर है मुख्य आरोपी, उसकी जमानत भी रद्द

इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट इससे पहले 29 जून को मुख्य आरोपी स्कूल के केयरटेकर की जमानत भी रद्द कर चुका है।

यह मामला 1 मई को तब सामने आया था, जब बच्ची की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि स्कूल के समय के दौरान केयरटेकर ने उनकी तीन वर्षीय बेटी के साथ यौन उत्पीड़न किया।

POCSO एक्ट के तहत दर्ज है मामला

पुलिस ने इस मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। हाई कोर्ट ने कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में अदालतों को जमानत पर फैसला लेते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। मामले की आगे की सुनवाई और जांच जारी है।