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”मुझे न्याय नहीं मिलेगा, क्यों​कि मैं सुशांत नहीं…” सुसाइड नोट में लिख युवक ने लगाई फांसी, मौत

-Haryana Suicide Case: हरियाणा के करनाल में एक युवक ने आत्महत्या कर ली।-युवक ने मरने से पहले इस सुसाइड नोट ( Suicide Note ) को फेसबुक ( Facebook ) पर अपलोड किया, जिसमें उसने मौत का जिम्मेदार करनाल के एक शोरूम मालिक को बताया।-उसने सुसाइड नोट में यह भी लिखा कि वह सुशांत सिंह राजपूत ( Sushant Singh Rajput ) की तरह फेमस नहीं है, इसलिए उसे न्याय नहीं मिलेगा। -पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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Naveen Parmuwal

Sep 14, 2020

haryana young man leave painful suicide note on facebook before died

''मुझे न्याय नहीं मिलेगा, क्यों​कि मैं सुशांत नहीं...'' सुसाइड नोट में लिख युवक ने दी जान

नई दिल्ली।
Haryana Suicide Case: 'मैं अमनदीप अपनी जिंदगी से परेशान हो गया हूं, बहुत कुछ सहन करते अब मैं थक गया हूं। दूसरों के सपनों को पूरा करते-करते मैं अपने सपने ही भूल गया। मुझे पता है कि मुझे न्याय भी नहीं मिलेगा, क्योंकि मैं सुशांत की तरह फेमस नहीं हूं। मैं गलत हूं, सब की नजरों में...।' सुसाइड नोट ( Suicide Note ) में कुछ ऐसी बातें लिखकर हरियाणा के करनाल में एक युवक ( Man Committed Suicide ) ने आत्महत्या कर ली। युवक ने मरने से पहले इस सुसाइड नोट को फेसबुक ( Facebook ) पर अपलोड किया, जिसमें उसने मौत का जिम्मेदार करनाल के एक शोरूम मालिक को बताया।

उसने सुसाइड नोट में यह भी लिखा कि वह सुशांत सिंह राजपूत ( Sushant Singh Rajput ) की तरह फेमस नहीं है, इसलिए उसे न्याय नहीं मिलेगा। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

शोरूम मालिक पर आरोप
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शांति नगर कालोनी निवासी अमनदीप एक कार कंपनी के शोरूम में काम करता था। उसने शनिवार शाम को आत्महत्या कर ली। मरने से पहले उसने एक पेज का सुसाइड नोट अपनी फेसबुक आइडी पर डाला था। परिजनों ने जब तक अमनदीप को देखा, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

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उसने सुसाइड नोट में लिखा, लास्ट टाइम अपने लिए कब खुश हुआ पता नहीं, ऑफिस की लाइफ में बहुत टाइम दिया। पता नहीं ही चलता कब रात के 12 आफिस में ही बज गए। भूल गया था कि रात में मेरे लिए भी मुझे रेस्ट करना है। अब लंबा रेस्ट चाहता हूं। शायद अपने को टाइम दिया होता तो आज अपने भी अपने होते। अपने जिनको समझा उन्होंने ही अपने मतलब के लिए साथ छोड़ दिया।

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क्या गलती मेरी बेटी की, जिसकी खुशियां अधूरी रही। क्या गलती मेरे मां-बाप की, जिनको सेवा नहीं नसीब हुई। सब बोलते हैं मैं ही गलत हूं। इक बार ये बताओ मैंने अपने लिए क्या किया? सब दूसरों के लिए किया। इस सब का रिस्पांसिबल केवल शोरूम के मालिक हैं और कोई नहीं, न मेरी फैमिली, न मेरा कोई फ्रैंड। सब शोरूम के मालिक के कारण हुआ। उन्होंने मेरी लाइफ खराब की। जानता हूं... बहुत पैसे वाले हैं और पैसों की सरकार है। अभी भी बच जाएगा वो पर जो मेरे अपने हैं जिनका मैंने दिल से बहुत किया। उनको मेरी कभी न कभी फिर से जरूरत होगी। मैं गलत हूं, सब की नजरों में।