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हाईवे गैंगरेपः यूपी पुलिस की कहानी थी संदिग्ध, अब सामने आया यह सच

28-29 जुलाई 2016 की रात को बुलंदशहर कोतवाली देहात क्षेत्र में नेशनल हाईवे-91 पर नोएडा के परिवार से दरिंदगी की घटना हुई थी।

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बुलंदशहर। देशभर को हिलाने वाले बुलंदशहर और जेवर में हुए हाईवे-गैंगरेप केसों में यूपी पुलिस और यूपी एसटीएफ की काली करतूतों का खुलासा हुआ है। हरियाणा के गुड़गांव में गिरफ्तार मेवाती गैंग ने इन दोनों वारदातों समेत 42 से ज्यादा हाईवे लूट और गैंगरेप की वारदातें कबूली हैं।

बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप केस की तफ्तीश कर रही सीबीआई ने इस गैंग के बदमाशों का बायोलॉजिकल टेस्ट कराया है, जिसमें आरोपियों के वारदात में शामिल होने की पुष्टि हो गई है। यानि बुलंदशहर और जेवर गैंगरेप केस के खुलासे में यूपी पुलिस और एसटीएफ की स्क्रिप्ट झूठी थी और इन केसों में बेगुनाहों को जेल भेजा गया था।

ये था मामला
28-29 जुलाई 2016 की रात को कोतवाली देहात क्षेत्र में नेशनल हाईवे-91 पर नोएडा के परिवार से दरिंदगी की घटना हुई थी। आधा दर्जन से अधिक बदमाशों ने नोएडा के परिवार की कार के नीचे एक्सल डालकर उसे रूकवाने के बाद उसमें सवार मां-बेटी से गैंगरेप किया और मारपीट कर लूटपाट की थी। इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया। तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा, डीजीपी जावीद अहमद ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था।

9 अगस्त की रात बुलंदशहर क्राइम ब्रांच ने अन्य तीन आरोपी सलीम बावरिया, परवेज उर्फ जुबैर और साजिद को मेरठ से गिरफ्तार किया था। बता दें कि डीजीपी ने जब इस केस का खुलासा किया तो नरेश उर्फ ठाकुर निवासी भटिंडा और बबलू निवासी फरीदाबाद के नाम बुलंदशहर के रईस नाम के बदमाश के साथ बताए थे। डीजीपी ने यह भी बताया था कि तीनों बदमाशों की शिनाख्त पीड़ित परिवार ने कर ली है, उसी आधार पर यह खुलासा हुआ है।

लेकिन बाद में पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को जेल भेजा उनमें बबलू और नरेश उर्फ ठाकुर नहीं थे। पुलिस ने इन दोनों के स्थान पर हापुड़ के शाबेज और नोएडा के जबर सिंह का नाम शामिल किया। निवर्तमान एसएसपी अनीस अहमद अंसारी ने उस समय पत्रकार वार्ता में बताया था कि डीजीपी की प्रेसवार्ता में बताए गए नाम गलत थे, तब तक बदमाशों के नाम की तस्दीक नहीं हो पाई थी। जिसकी वजह से दूसरे बदमाशों को जेल भेजा गया। निवर्तमान एसएसपी ने साफ कहा कि डीजीपी के बताए गए ये दोनों नाम गलत थे। जिन बदमाशों को जेल भेजा गया है उनके नाम-पते सही हैं।

अब पकड़ में आए असली आरोपी
हरियाण की गुड़गांव पुलिस ने बीते दिनों मेवात में हुए गैंगरेप केस में कई महीनों की मशक्कत के बाद जब एक लुटेरों का गैंग पकड़ा तो उसने यूपी पुलिस के चेहरे को बेनकाब कर डाला। गिरफ्तार किए गए गैंग ने खुलासा किया कि हरियाणा ही नहीं, यूपी के बुलंदशहर और जेवर समेत कई राज्यों में उस गैंग ने 42 से ज्यादा इस तरह की गैंगरेप और लूट की वारदातों को अंजाम दिया है।

बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप की जांच कर रही सीबीआई ने शुरूआती पूछताछ के बाद जब बदमाशों का बायोलॉजिकल मिलान कराया तो पीड़िता से हुई वारदात की पुष्टि हो गई। यानि बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप में बड़े-बड़े खुलासे करके आरोपियों को जेल भेजने वाली बुलंदशहर पुलिस ने बेगुनाहों की गर्दनें दबा डाली और उन बेकसूरों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

सपा सरकार की हुई थी थू-थू
अखिलेश यादव के राज में हुए बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप केस में पुलिस की जबरदस्त थू-थू हुई। इस केस के पहले खुलासे में बेगुनाहों को जेल भेजने की कोशिश में बुलंदशहर के तत्कालीन एसएसपी वैभव कृष्ण, एसपी सिटी राममोहन, सीओ हिमांशु गौरव, इंस्पेक्टर रामसेन समेत करीब 19 पुलिसकर्मी सस्पैंड किये गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने केस सीबीआई के हाथ में दे दिया। लेकिन तब तक यूपी पुलिस केस का बेड़ागर्क कर चुकी थी। इसलिए सीबीआई के हाथ मजबूत सुराग नहीं लग सके। मगर जब सीबीआई को गुड़गांव में इस केस से जुड़े बदमाशों के गैंग की जानकारी मिली तो सीबीआई ने गंभीरता से जांच करते हुए बदमाशों से सबूत मिलान और बयान दर्ज कर लिए। गुड़गांव में गिरफ्तार इस गैंग ने जेवर हाइवे पर हुई गैंगरेप, लूट और मर्डर की वारदात को भी अंजाम दिया है।