देश को 900 आईएएस देने वाले शंकर देवराजन हारे जिंदगी की जंग, पत्नी से झगड़े के बाद की आत्महत्या

देश को 900 आईएएस देने वाले शंकर देवराजन हारे जिंदगी की जंग, पत्नी से झगड़े के बाद की आत्महत्या

Shiwani Singh | Publish: Oct, 13 2018 01:16:18 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 02:52:11 PM (IST) क्राइम

किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे शंकर देवराजन

नई दिल्ली। एक ऐसा व्यक्ति जिसने देश के नौजवानों को सबसे बड़ी प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस बनने की शिक्षा दी। ऐसा व्यक्ति जिसने एक एकेडमी की शुरुआत कर सैकड़ों आईएएस तैयार किए। आईएएस बनना किसी के लिए जितना कठिन है उतना ही उसे पढ़ाना किसी शिक्षक के लिए मुश्किल। इन सब समस्याओं का सामना करते हुए एक व्यक्ति निरंतर आईएएस ऑफिसर्स तैयार किए जा रहा था। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि अपने छात्रों को विनम्रता और शांति से किसी काम को करने की शिक्षा देने वाले आईएएस एकेडमी के फाउंडर और सीईओ प्रोफेसर शंकर देवराजन महज 45 साल की उम्र में जिंदगी की जंग हार गए और फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली।

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देवराजन की मौत की वजह इतनी मामूली है कि जो भी इसे सुन रहा है वह हैरान रह जा रहा है। कोई भी यह विश्वास नहीं कर पा रहा है कि आईएएस अफसर तैयार करने वाले तमिलनाडु में मशहूर शंकर देवराजन ने महज पत्नी से झगड़े की वजह से खुद को खत्म कर लिया। शंकर का आत्महत्या करना चौंका देने वाला है और सोचने को मजबूर करने वाला है कि ऐसा क्या झगड़ा हुआ की वे इसे झेल नहीं पाए और मौत को गले लगा लिया।

आत्महत्या से पहले पत्नी से हुई थी लड़ाई

पुलिस के मुताबिक आत्महत्या से पहले शंकर देवराजन का अपनी पत्नी से किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसके बाद चेन्नई के माइलपुर में उनके निवास पर उन्हें मृत पाया गया। पड़ोसी गुरुवार देर रात शंकर को निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बता दें कि कृष्णगिरी के रहने वाले शंकर देवराजन के परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे।

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900 से ज्यादा आईएएस दिए

गौरतलब है कि साल 2004 से अब तक उनकी एकेडमी ने 900 से ज्यादा आईएएस दिए हैं। उनकी मौत के बाद छात्र काफी दुखी हैं। बता दें कि शंकर देवराजन ने 2004 में अन्ना नगर, चेन्नई में शंकर आईएएस एकेडमी की शुरुआत की थी। शंकर की एकेडमी राज्य की पहली एकेडमी थी, जिसका लक्ष्य आईएएस और आईपीएस उम्मीदवारों को प्रशिक्षित करना था। वहीं, इस एकेडमी में मुख्य रूप से पिछड़े समुदायों के उम्मीदवारों पर खास ध्यान दिया जाता था। ताकि वह भविष्य में सफलता हासिल कर सकें। लेकिन उनके ऐसे आत्महत्या करने से काफी क्षति हुई है, जिसे भरना काफी मुश्किल होगा।

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