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बच्चियों को बिना कपड़ों के कंधे पर मूसल रखकर पैदल चलवाया

अच्छी बारिश के लिए टोटका, सूखा से फसलों को बचाने बालिकाओं को निर्वस्त्र कर महिलाओं ने गांव में लगाई फेरी।

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दमोह

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Hitendra Sharma

Sep 06, 2021

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दमोह. जिले के आदिवासी बाहुलय जबेरा ब्लॉक के बनिया गांव में प्रथा के नाम पर अमानवीयता सामने आई है। अच्छी बारिश के लिए टोटका करने बच्चियों को बिना कपड़ों के गलियों में घुमाया गया। यहां बच्चियां कंधे पर मूसल रखकर चल रही थीं, जिसमें मेंढकी बांध रखी थी।

गांव में बच्चियों को आगे कर महिलाएं खेर माता मंदिर पहुंची और पूजा करके प्रतिमा पर गाय का गोबर थोप दिया। महिलाओं कहना था कि इससे इतनी होती है कि माता की प्रतिमा पर गोबर धुल जाता है। बारिश के लिए किए गए इस टोटके में बच्चियों के साथ इस अमानवीयता पर गांव के लोगों से कोई जबाब नहीं मिला।

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जिले में इस साल बारिश नहीं होने की वजह से सूखे की स्थिति निर्मित हो चुकी है और खरीफ सीजन की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाकों के लोग तरह तरह के जतन कर रहे हैं, जिनमें टोटके भी शामिल हैं। रविवार की दोपहर जबेरा ब्लॉक की महिलाओं ने इंद्र देव को मनाने के लिए अपनी बालिकाओं को नग्न करके पूरे गांव में फेरी लगाई। ग्राम की महिलाओं ने बताया कि हम लोग अपने नग्न ब'चों से मेंढकी को मूसर अर्थात जिससे अनाज कूटते हैं उसमें बांधकर गांव की गलियों में घुमा रहे हैं और कीर्तन कर भगवान से बारिश की प्रार्थना कर रहे हैं।

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बता दें कि महिलाओं ने गांव में भजन कीर्तन करते हुए फेरी लगाई और खेर माता के मंदिर में पहुंचकर मंदिर में विराजमान देवी की प्रतिमा को गोबर से थोपा। महिला अयोध्या रानी ठाकुर, रामारानी आदिवासी ठाकुर और रतन रानी ठाकुर बताया कि हम लोगों ने खेर माता मंदिर में माता रानी को गाय के गोबर से थोप दिया है।

ऐसा माना जाता है कि बालिकाओं को नग्न करके मेंढकी को मूसर में बांधकर गांव की गलियों से घुमाते हुए खेर माता मंदिर में माता रानी के पास ले जाएंगे। इसके बाद गांव के प्रत्येक घर से सीधा मांगेंगे जिसमें आटा, चावल, दाल और नमक रहेगा और दोबारा माता रानी के मंदिर में जाकर गांव की सभी औरतें और पुरुष गक्कड़ बनाकर प्रसाद स्वरूप भोजन करेंगे।

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उन्होंने बताया कि जब-जब हमारे क्षेत्र में सूखा की स्थिति होती है, तो हम सभी गांव की महिलाएं और पुरुष ऐसा ही करते हैं। ऐसा करने से इंद्र भगवान बारिश करते हैं। जिससे हमारे खेत पानी से लबालब भर जाते हैं। उन्होंने बताया कि पानी इतना तेज गिरता है कि माता के शरीर में लगा गाय का गोबर अपने आप तेज बारिश से धुल जाता है और हमारी फसलें भी माता रानी की कृपा से अ'छी होती है।

प्रदेश में सबसे अधिक सूखा दमोह में
भू अभिलेख विभाग के राजस्व निरीक्षक नीलेश मिश्रा ने पत्रिका को जानकारी देते हुए बताया है कि प्रदेश स्तर पर प्राप्त हुए आंकड़ों के अनुसार दमोह जिला प्रदेश के सबसे अधिक कम बारिश वाला जिला है। अभी तक के रिकॉर्ड में माइनस -47 वर्षा दमोह में दर्ज हुई है। जिले की सामान्य वर्षा 903 एमएम है, जबकि अभी तक मात्र 482 एमएम हुई है। बता दें बारिश नहीं होना लोगो के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है और किसान बारिश की उम्मीद में देवी देवताओं को मानने में लगे हैं।

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कलेक्टर दमोह एसकृष्ण चैतन्य ने कहा कि दमोह को सूखाग्रस्त जिले में शामिल किया गया है, ऐसे कोई आदेश शासन से अभी नहीं मिले हैं। बारिश कम होने की वजह से कृषि कार्य जिले में अवश्य प्रभावित है। बनिया गांव में बारिश की उम्मीद में बच्चियों को नग्न कर पूजा अर्चन किए जाने की बात अभी मेरे संज्ञान में आई है। एसपी दमोह डीआर तेनीवार ने बताया कि बारिश नहीं होने से किसान परेशान हैं, कई जगहों पर तरह के टोटके होते हैं। बनिया गांव में भी जो होना बताया जा रहा है वह भी किसी प्रथा के तहत वहां के लोगों ने किया होगा, मैं पता करता हूं।