
सपने में दिखने के बाद जमीन से निकली थी भगवान गणेश की ये प्रतिमा, स्थापित होते ही हो गई थी गायब
इन दिनों देशभर में गणेशोत्सव की धूम है। ऐसे में हम आपको मध्य प्रदेश के दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सादपुर गांव में विराजमान भगवान गणेश की पाषाण प्रतिमा की अद्भुत महिमा के बारे में बता रहे हैं। आपको बता दें कि, भगवान गणेश की ये प्रतिमा सपने में दिखाई देने के बाद जमीन के नीचे से निकली थी। किवंदती तो ये भी है कि, इस प्रतिमा के स्थापित होने के बाद अपने स्थान से गायब भी हो गई थी और जहां से वो जमीन से निकली थी, दोबारा वहीं से मिली थी।
प्रतिमा की स्थापना की खुशी में यहां 50 सालों से सात दिवसीय मेले का आयोजन भी ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है। गजानन की पांच फीट ऊंची प्रतिमा गांव के लोग बरी कनौरा गांव से लाए थे। ग्रामीणों का कहना है कि, गांव में रहने वाले एक शख्स को भगवान गणेश की ये प्रतिमा सपने में दिखी थी। युवक ने सपने में देखा था कि, कनौरा गांव की जमीन में भगवान गणेश की मूर्ति धंसी है। व्यक्ति ने ग्रामीणों को सपने के बारे में बताया। गांव वाले तुरंत ही उसे लेकर संबंधित स्थान पर पहुंचे, जहां खुदाई के दौरान गणेश प्रतिमा जमीन से निकल आई। इसके बाद गांव के लोग उस प्रतिमा को सादपुर ले आए।
सादपुर में मंदिर निर्माण कर भगवान की गणेश बैठी हुई मुद्रा वाली इस प्रतिमा को स्थापित किया। खास बात ये है कि, मंदिर में स्थापित मूर्ति में भगवान एक हाथ में फरशा लिए हुए हैं। सबसे खास बात ये है कि पूरी प्रतिमा एक ही पत्थर पर उकेरी गई है। भगवान गणेश के मान स्वरूप सादपुर में मेला और साप्ताहिक हाट बाजार लगाया जाता है।
50 सालों से गांव में लगता आ रहा है मेला
बरी कनौरा गांव से लाई गई भगवान गणेश की प्रतिमा सादपुर गांव के मंदिर में विराजमान होने की खुशी में सादपुर और आसपास के गांव के लोगों द्वारा मंदिर परिसर के पास सात दिवसीय मेला लगाया जाता है। मूर्ति स्थापना के 50 से अधिक साल के बाद भी गांव में मेला भरने की परंपरा चली आ रही है। हालांकि, ये मेला मूर्ति स्थापना दिवस गणेश चतुर्थी के समय लगता है। मेले में सादपुर समेत दर्जनों गांवों के ग्रामीण शामिल होते हैं जो भगवान गणेश के दर्शन कर मेले का आनंद लेते हैं।
रात में अपने आप वापस हो गई थी मूर्ति
इस संबंध में सादपुर गांव के एक ग्रामीण रतिराम विश्वकर्मा का कहना है कि, उन्होंने भी अपने बड़ों से सुना है कि, गांव के किसी बुजुर्ग व्यक्ति को सपने में भगवान गणेश की ये प्रतिमा दिखी थी, जिसके बाद संबंधित गांव पहुंचकर खुदाई की तो जमीन से भगवान गणेश की मूर्ति निकली। इसके बाद गांव के लोग मूर्ति लेकर सादपुर आ गए। यहां गाव के चबूतरे पर मूर्ति स्थापित कर दी। दूसरे दिन मूर्ति उक्त स्थल से गायब हो गई। ग्रामीण परेशान थे कि, रातभर में मूर्ति कहां गई। बाद में पता चला की मूर्ति जिस स्थान से लाई गई थी, वहीं पहुंच गई। बुजुर्गो की सलाह पर मिहीलाल पाठक द्वारा ग्रामीणों के साथ कनौरा गांव जाकर भगवान से चलने का निवेदन किया
और मूर्ति बेलगाड़ी पर रखकर सम्मान के साथ लाई गई और मंदिर की स्थापना कर विधि विधान मूर्ति स्थापित की गई। तब से मूर्ति यहां यथावत है। लोगों की आस्था के केंद्र इस गणेश मंदिर में दस दिनों तक दूर-दूर से लोग भगवान के दर्शन करने आते हैं।
Published on:
22 Sept 2023 06:12 pm
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