
कृषि धन-धान्य योजना में दंतेवाड़ा जिला ने रचा इतिहास ( Photo - AI Generate)
Chhattisgarh News: दक्षिण बस्तर के वनांचल क्षेत्र दंतेवाड़ा ने कृषि विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कृषि धन-धान्य योजना के क्रियान्वयन, निर्धारित प्रमुख संकेतकों (केपीआई) की शत-प्रतिशत प्रविष्टि एवं अद्यतन मूल्यांकन में दंतेवाड़ा जिले ने देशभर के चयनित 100 जिलों में 5वां स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष 10 में स्थान बनाने वाला पहला और एकमात्र जिला बना है।
इस उपलब्धि के पीछे योजना के विभिन्न घटकों पर किए गए कार्यों को प्रमुख आधार बताया गया है। योजना के तहत निर्धारित सभी प्रमुख संकेतकों का समयबद्ध संकलन, सत्यापन और पोर्टल पर शत-प्रतिशत सटीक प्रविष्टि सुनिश्चित की गई। मैदानी अमले की सक्रियता से योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
दंतेवाड़ा की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोदो-कुटकी, रागी और देशी धान की किस्मों के उत्पादन को वैज्ञानिक तरीकों से बढ़ावा दिया गया। इसके साथ ही जैविक खेती और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के लिए रासायनिक खादों के स्थान पर वर्मीकंपोस्ट और प्राकृतिक जीवामृत के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया। मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन की सलाह भी दी गई।
योजना के तहत चेकडैम और डबरी जैसी जल संचयन संरचनाओं के विकास के साथ ड्रिप एवं स्प्रिंकलर ङ्क्षसचाई को बढ़ावा दिया गया। इससे किसानों को द्विफसली खेती की ओर बढऩे में मदद मिली है।
जिला प्रशासन के अनुसार, यह उपलब्धि जिले के मेहनतकश किसानों और कृषि विभाग के मैदानी अमले के समर्पण का परिणाम है। 100 चयनित जिलों में देश में पांचवां और छत्तीसगढ़ में पहला स्थान हासिल करना यह दर्शाता है कि मजबूत संकल्प के साथ भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद विकास की नई राह बनाई जा सकती है। दंतेवाड़ा का यह प्रदर्शन अन्य आकांक्षी एवं जनजातीय जिलों के लिए प्रेरणादायक मॉडल के रूप में सामने आया है। यह दर्शाता है कि पारदर्शी प्रशासनिक कार्यशैली और किसान-केंद्रित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से सुदूर अंचलों में भी राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
कृषक उत्पादक संगठनों और स्व सहायता समूहों के माध्यम से किसानों को सीधे बाजार से जोडऩे पर भी जोर दिया गया। इससे कृषि उत्पादों का उचित मूल्य मिलने और बिचौलियों की भूमिका कम करने की दिशा में काम हुआ।
Updated on:
16 Sept 2026 12:31 pm
Published on:
16 Sept 2026 12:31 pm
