
Yoga Day 2020: Coronavirus काल में विश्व के पहले योग विश्वविद्यालय में ताला, अद्भुत है यहां का इतिहास
प्रियरंजन भारती
दरभंगा,मुंगेर: छठे विश्व योग दिवस (International Yoga Day) पर मुंगेर स्थित योग विद्यालय में सामूहिक योग कार्यक्रमों पर कोरोना का ग्रहण लग चुका है। योगदिवस पर सूर्यग्रहण के कारण नहीं बल्कि ऐसा कोरोना संक्रमण के फैलने के चलते किया गया है। जिलाधिकारी के आदेश पर स्कूल ऑफ योगा पहले ही से अगले आदेश तक बंद किया जा चुका है।
योग दिवस पर होते हैं बड़े कार्यक्रम
विश्व योग दिवस पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त योग विद्यालय में योग के व्यापक प्रचार प्रसार के लिए बड़े आयोजन किए जाते रहे हैं। मगर योग विद्यालय ने छठे विश्व योग दिवस पर सभी से निवेदन किया कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अलग—अलग बैठकर योगासन करें।भाजपा के जिलाध्यक्ष राजेश जैन ने कहा कि। मुंगेर वैसे भी कोरोना संक्रमण के फैलने में चर्चित रहा है। योग विद्यालय ने इसका ध्यान रखते हुए ही विद्यालय को अगले आदेश तक बंद करा दिया हुआ है।
जिलाधिकारी के आदेश पर हुआ है बंद...
जिलाधिकारी राजेश मीणा के आदेश पर योग विद्यालय अगले आदेश तक लॉकडाउन के समय ही बंद कर दिया गया। ऐसा यहां रहकर योग शिक्षा ग्रहण करने वाले संन्यासियों के बचाव के लिए किया गया। यहां रहकर योग शिक्षा ग्रहण करने वाले संन्यासी देश विदेश के हैं जो अनुशासित रहकर नियमित योगाभ्यास करते हैं। इन्हें योगाभ्यास के साथ जीवन के बहुमूल्य संस्कार भी दिए जाते हैं। संस्थान की स्थापना 1963 में की गई थी। 40 वर्षों से यहां से जुड़े रहे शिवकुमार रूंगटा कहते हैं कि योग के विस्तार के लिए समय समय पर यहां विशेष आयोजन किए जाते रहे हैं। विश्व योग दिवस पर हर साल यहां के कार्यक्रम चर्चित और यादगार बने हैं।
दुनिया का पहला योग विश्वविद्यालय
प्राचीन भारत के नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालयों की तरह ही यह दुनिया का पहला योग विश्वविद्यालय है। अध्ययन के दौरान यहां के योगार्थी भी बाहरी दुनिया की सूचनाओं से एकदम अलग रहा करते हैं। यह ऐसा संस्थान है भारतीय संस्कृति की धरोहर सहेजें हुए आगे बढ़ता जा रहा है। 1937 में स्वामी शिवानंद सरस्वती जब ऋषिकेश से मुंगेर आए तो गंगा तट पर अद्भुत शांत और सुमनोहर स्थान देख अपने शिष्य स्वामी सत्यानंद सरस्वती के साथ लोगों को योग का संदेश देने लगे। गुरु से दीक्षित हुए परमहंस संन्यासी सत्यानंद सरस्वती भारत, अफगानिस्तान, नेपाल, म्यांमार और श्रीलंका आदि देशों की यात्राएं कर यौगिक क्रियाओं पर अनेक शोध किए।1956 में अंतरर्राष्ट्रीय योग मंडल की स्थापना कर मुंगेर के गंगा तट पर 'गंगा दर्शन आश्रम ' की नींव रखी। उन्होंने कालांतर 1963 में बिहार स्कू ऑफ योगा की स्थापना की। फिर वह वैज्ञानिक तरीके से योग सीखने लिए लोगों को प्रेरित करने लग गए। उन्होंने योग पर 300 किताबें लिखीं। बाद में वह देवघर के रिखिया आ गए और 2009 में महासमाधि ले ली।
मनोरम और मनोहारी दृश्य यहां का
पहाड़ियों पर निर्मित बिहार स्कूल ऑफ योगा के बगल से गंगा बहती है। पहाड़ी काटकर बनाए गए आश्रम को शिवानंद आश्रम नाम दिया गया था। 1985 में इसका नाम बदलकर बिहार स्कूल ऑफ योगा किया गया। संस्थान की नौमंजिली इमारत के चारों तरफ खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य हमेशा मौजूद रहता है। ऐतिहासिक रूप से यह स्थान यह स्थान महाभारत कालीन कर्ण चौड़ा कहलाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अंगराज कर्ण का अंग प्रदेश (भागलपुर-मुंगेर) यहीं था और कर्ण इसी स्थान विशेष पर बैठकर दान तप और साधना किया करते थे।
गुरुकुल जैसा कड़ा अनुशासन
चार महीनों यौगिक स्टडीज कोर्स कर चुकीं निर्मला सिंह बताती हैं कि यहां की दिनचर्या सुबह चार बजे शुरु हो जाती है। व्यक्तिगत योग साधना के बाद योग कक्षाएं शुरु होती हैं। रात को सोने से पहले तक मौन रहना या धीमी आवाज में बोलना है। टीवी, रेडियो, अखबार से कोई सरोकार नहीं रखना होता है। नियम तोड़ने पर चार किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ जाती है। बाहरी भोजन वस्त्र वर्जित है।
सूर्यग्रहण के साथ बना योग दिवस का संयोग
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इस बार सदी के खास सूर्यग्रहण (Solar Eclipse 2020) का होना भी एक खास संयोग बना है।सूर्यग्रहण काल में ज्यादातर गतिविधियां कम पड़ जाती हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा जागृत करने के अनुष्ठानों की होड़ लग जाती है।कोरोना संक्रमण के अलावा अधिकांश लोग ग्रहण के दरमियान किसी और कार्य में कम ही भागीदारी निभा पाएंगे। हालांकि पतंजलि योग पीठ के योग गुरु और ऐक्यूप्रेशर विशेषज्ञ डॉ नीतेश कुमार कहते हैं कि योग तो शारीरिक मानसिक विकृतियों को निर्मूल लोगों को मजबूत करता है।ऐसे में एहतियात बरतते हुए योग दिवस पर योगासन का अभ्यास करने से कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
Published on:
21 Jun 2020 04:22 pm

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