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27 हजार आवेदन लम्बित, भटक रहे हैं लाभार्थी

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dausa labour department

27 हजार आवेदन लम्बित, भटक रहे हैं लाभार्थी

दौसा. जिले में श्रमिकों एवं उनके बालकों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के 27 हजार 50 लाभार्थियों के आवेदनों की फाइलें धूल फांक रही हैं। जिला मुख्यालय के श्रम कल्याण अधिकारी कार्यालय एवं पंचायत समिति मुख्यालयों पर लाभार्थी चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनको योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों की माने तो जिन लाभार्थियों की पहुंच हैं, उनकी फाइलें तो तुरंत पास हो जाती है, लेकिन गरीब-असहाय लोगों की नहीं सुनी जाती। श्रमिकों को जगह- जगह टरकाया जा रहा है।


ये योजनाएं हैं संचालित


श्रम विभाग के अधीन इस समय निर्माण श्रमिक औजार/टूलकिट सहायता योजना, निर्माण श्रमिक जीवन व भविष्य सुरक्षा योजना, निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना, प्रसूति सहायता योजना, शुभशक्ति योजना, सिलिकोसिस पीडि़त हिताधिकारी के लिए सहायता योजना एवं हिताधिकारी की सामान्य अथवा दुघर्टना में मृत्यु या घायल या घायल होने की दशा में सहायता योजना 2014 संचालित हैं।

इस योजना में इतने मामले


श्रम विभाग के अधीन इस समय निर्माण श्रमिक औजार/टूलकिट सहायता योजना के 8, निर्माण श्रमिक जीवन व भविष्य सुरक्षा योजना के 17, निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना 19 हजार 807, निर्माण सुलभ्य आवास योजना के 18, प्रसूति सहायता योजना 886, शुभशक्ति योजना के 5 हजार 974, सिलिकोसिस पीडि़त हिताधिकारी के लिए सहायता योजना के 207 एवं हिताधिकारी की सामान्य अथवा दुघर्टना में मृत्यु या घायल या घायल होने की दशा में सहायता योजना 2014 संचालित योजना के 133 मामले लम्बित हैं।

इन दो योजनाओं में लम्बित हैं सर्वाधिक मामले


राजस्थान सरकार ने 1 जनवरी 2016 में शुभशक्ति योजना लागू की थी। इस योजना में बालिका के माता-पिता दोनों में से कोई एक वर्ष से श्रमिक विभाग में पंजीयन होना चाहिए। लाभार्थी कम से कम 8वीं पास होनी चाहिए। बेटी का बैंक में खाता होना चाहिए। उसको शादी के बाद 55-55 हजार रुपए की राशि की सहायता दी जाती है। जिले में इस योजना में लाभ लेने वालों के 5 हजार 974 आवेदन लम्बित पड़े हैं। इसके अलावा सबसे अधिक निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना 19 हजार 807 आवेदन लम्बित है। इस योजना में श्रमिकों के बालकों को छात्रवृत्ति देने की योजना है।



डायरी ही नहीं बन रही


श्रम विभाग में योजना का लाभ मिलना दूर कइयों की तो एक-डेढ़ वर्ष से श्रमिक डायरियां ही नहीं बन पा रही है। लोग ई-मित्रों पर ऑनलाइन तो कर देते हैं, लेकिन सम्बन्धित अधिकारी के मोबाइल पर ओटीपी आता है। इस चक्कर में अधिकारी श्रमिकों की डायरियां ही नहीं बना रहे हैं।

बदलते रहते हैं अधिकार


पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि कभी श्रमिकों की श्रमिक डायरी हो या उनको मिलने वाले लाभ के अधिकार पंचायत समिति विकास अधिकारियों के पास जाते हैं तो कभी श्रम विभाग के अधिकारियों के पास। ऐसे में लाभार्थी भी हमेशा पशोपेश में ही रहते हैं। इस वक्त श्रम विभाग कार्यालय में स्टाफ का टोटा चल रहा है। ऐसे में अधिकांश काम विकास अधिकारियों को सौंप रखा है।

विकास अधिकारियों के पास है काम


31 दिसम्बर 2018 तक इन योजनाओं में लाभ देने के अधिकार पंचायत समिति विकास अधिकारियों के पास थे। अब नए कमिश्नर आए हैं, नए आदेश आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
- विक्रमसिंह, श्रम कल्याण अधिकारी दौसा