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अमृतं जलम् अभियान: श्रमदान की लगी लगन

पुलिस थाने के समीप एनिकट पर श्रमदान
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अमृतं जलम् अभियान

अमृतं जलम् अभियान: श्रमदान की लगी लगन

सैंथल. राजस्थान पत्रिका के अमृतं जलम् अभियान के तहत रविवार को सैंथल कस्बे में पुलिस थाने के समीप एनिकट पर श्रमदान किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत थानाधिकारी नरेश शर्मा, युवा मोर्चा भाजपा मण्डल अध्यक्ष प्रकाश सैनी, पं.स. सदस्य लक्ष्मीनारायण सैन ने फ ावड़ी से मिट्टी की खुदाई कर की।

वहीं पुलिस थाने के पूरे स्टाफ ने फावड़ी-परात लेकर एनिकट में श्रमदान किया। कोई मिटï्टी खोद रहा था, तो कोई तगारी में मिट्टी डालकर तालाब की पाल पर डाल रहा था। तेज धूप में पसीने से तर-बतर होने के बाद भी मेहनत के साथ मेहनत करते रहे। वहीं एनिकट में कटीले झाड़, बबूल व कचरे क ी सफ ाई की साथ ही मौजूद लोगों ने कचरा नहीं फै लाने, अपने आस-पास का परिसर साफ रखने, पानी बचाने, पेयजल स्त्रोतों को गंदगी से बचाने की शपथ ली।


इस मौके पर एएसआई रामजीलाल शर्मा, राकेश सिंह, हैड कांस्टेबल उमराव सिंह, कमलेश शर्मा, वार्ड पंच रामदयाल शर्मा, हनुमानसहाय सैनी, कमलेश भेडवाल, भागचन्द महावर, कनिष्ठ सहायक बाबूलाल मीणा सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।

पेयजल के लिए दर-दर भटकते पुलिसकर्मी, थाने में बोरिंग खराब


खेड़ला. सलेमपुर थाना परिसर में पीने की पानी की किल्लत है। गत एक सप्ताह से थाना परिसर में स्थित बोरिंग खराब होने से पुलिसकर्मियों को पेयजल के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। इस थाने में 25 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिन्हें अब राजकीय कामों से पहले पीने के पानी की जुगत करनी पड़ रही है। खरीदकर पेयजल व्यवस्था करनी पड़ती है।


थानाप्रभारी रामकिशोर चौधरी ने बताया कि बोरिंग मात्र 100 फीट गहरा है। इसमें बार-बार मोटर और उपकरण खराब हो जाते हैं। निजी खर्च से ठीक कराना पड़ रहा है। पेयजल किल्लत के बारे में ग्राम पंचायत व जलदाय विभाग के अधिकारियों को सूचित किया है।

महेश्वराकलां ञ्च पत्रिका. कस्बे सहित आस-पास के क्षेत्र में पेयजल सप्लाई के लिए कई दशक से सरकारी पेयजल सप्लाई योजना का इंतजार है। ऐसे में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए भटकना पड़ रहा है, लेकिन जलदाय विभाग एवं पंचायत का आमजन की समस्या से कोई सरोकार नजर नहीं है।


वर्ष 1954 में ग्राम पंचायत की स्थापना के बाद अभी तक पेयजल के लिए नल कनेक्शन की योजना नहीं बन पाई है। जबकि ग्राम पंचायत महेश्वरा कलां एवं महेश्वरा खुर्द से दर्जनों गांव-ढाणियां जुडी हुई है। इनमें करीब 8 हजार लोग निवास कर रहे हैं, लेकिन दोनों ही ग्राम पंचायत में जलदाय विभाग की ओर से एक-एक टंकी बनी हुई है। इनसे भी पेयजल सप्लाई की कोई व्यवस्था नहीं है। महेश्वराखुर्द में तो बोरिंग में जलस्तर नीचे होने से टंकी सूखी पड़ी है। महेश्वराकलां में भी नलकूप चंद मिनट ही चल पाता है। महिलाओं को सुबह होते ही दूर-दराज से निजी बोरिगों से पानी लाना पड़ता है। क्षेत्र के अधिकांश हैण्डपंप भी सूखे पड़े है।