
असुविधाओं की बांदीकुई मण्डी
बांदीकुई. कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं का आलम होने से किसान, पल्लेदार एवं व्यपारियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है, लेकिन मण्डी समिति प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में मंडी के व्यापारी व किसान अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। पहले माधोगंज में कृषि उपज मण्डी संचालित थी, लेकिन वाहनों को आवागमन में परेशानी होने पर सिकंदरा रोड पर मण्डी को स्थानान्तरित कर दिया गया। यहां सुविधाओं की कमी परेशानी बनी हुई है। दुकानों के आगे टिनशैड नहीं होने से व्यापारियों को सड़क के बीच जिंस की ढेरियां लगाकर नीलामी करनी पड़ती है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी होती है।
व्यापारी विजय जैन का कहना है कि दुकानों के आगे टिनशैड नहीं होने से गर्मी के दिनों में तेज हवा चलने पर धूल उड़ती है और दुकानों में भर जाती है। दुकानों के आगे से उठाया गया कचरा भी आस-पास ही डाल देने से वापस बिखर जाता है।
व्यापारी जगदीश शर्मा का कहना है कि मंडी शहर से 2 किमी दूर होने से व्यापारियों को लेन-देन के लिए बैंक आवाजाही करनी पड़ती है। ऐसे में सरकार को मण्डी परिसर में ही बैंक स्थापित करना चाहिए। व्यापारी बैंक से रुपए लेकर मण्डी जाने पर हिचकिचाहट महसूस करते हैं।
सिकराय निवासी किसान धमसीराम मीणा का कहना है कि काश्तकारों को कोई सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। विश्राम गृह आधे हिस्से में कृषि उपज मंडी का कार्यालय चलता है। जबकि आधा हिस्सा मण्डी की बैठकें आयोजित करने के काम आता है। हालांकि इसमें कुछ बैड लगा रखे हैं, लेकिन इनका कोई उपयोग नहीं हो रहा है।
करतार सिंह गुर्जर का कहना है कि इस मण्डी में कई तहसीलों के किसान आते हैं, लेकिन विश्रामगृह चालू नहीं होने से पेड़ों की छांव में बैठकर समय बिताना पड़ता है। पानी की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है। चाय नाश्ते के लिए कोई दुकान नहीं है। विभिन्न प्रकार के जिन्सों के भाव जानने के लिए सेटेलाइट की व्यवस्था नहीं है। जहां अन्य मण्डियों के जिंस की के भाव की जानकारी ले सकें। पल्लेदार भगवान सहाय सैनी का कहना है कि विश्राम गृह का अभाव है। गर्मी में पेड़ों की छाया अथवा बोरी के टांट लगाकर आराम करना पड़ता है। देर रात तक काम करते समय प्रकाश की व्यवस्था पूरी नहीं होने के अंधेरे में काम करना पड़ता है। मण्डी में अभी तक हाईमास्ट लाइटें तक नहीं लगी हैं। बिजली की हाईटेंशन लाइन के तार हादसे को न्योता दे रहे हैं। जनसी लाल का कहना है कि यहां व्यापारियों को पानी टैंकरों से पीना पड़ रहा है।पानी की स्थाई व्यवस्था नहीं है। बोंरिंग खराब है। शौचालयों की स्थिति खराब है। (नि.सं.)
Updated on:
06 Jan 2019 02:48 pm
Published on:
06 Jan 2019 02:48 pm
