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सावधान… कहीं आप नहीं हो जाएं साइबर ठगी के शिकार

लिंक मैसेज पर क्लिक करते ही खाते से हो रही है राशि पार, पुलिस के लिए भी गलफांस बना बढ़ता साइबर अपराध
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सावधान... कहीं आप नहीं हो जाएं साइबर ठगी के शिकार

सावधान... कहीं आप नहीं हो जाएं साइबर ठगी के शिकार

बांदीकुई. सावधान.. कहीं आप नहीं हो जाए साइबर ठगी के शिकार? क्योंकि इन दिनों क्षेत्र में लोगों की साइबर ठगी से जुड़ी वारदातों में लगाता इजाफा होता जा रहा है, लेकिन इन वारदातों को रोकना पुलिस प्रशासन के लिए भी गलफांस बना हुआ है।
साइबर अपराधी सोशल मीडिया के जरिए लोगों के पास स्वयं के पेमेंट एप्स् के लिंक (वेब) भेज रहे हैं। जहां उस लिंक पर मोबाइल धारक के क्लिक करते ही सोशल मीडिया आईडी हैंग कर दी जाती है और पासवर्ड चेंज कर देते हैं। इसके बाद सम्बंधित सोशल मीडिया आईडी से मित्रों के पास मैसेज भेजकर बीमारी का बहाना या कोई परेशानी बनाकर राशि ट्रांसफर करने के लिए कहते दिखाई देने लगे हैं।

ऐसे में लोग भरोसा करके साइबर अपराधियों द्वारा भेजे जाने वाले खाते, पीटीएम खातों में रुपए ट्रांसफर कर ठगी के शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा बैंक खाते व डिजीटल ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की केवाईसी अपडेट करने से जुड़े मोबाइलों पर लिंक मैसेज भी ठगी की वारदातें शुरू हो गई हैं। इसमें लिंक पर क्लिक करते ही यदि व्यक्ति का वह मोबाइल नम्बर किसी भी बैंक खाते से जुड़ा हुआ है तो उस व्यक्ति की बैंक सम्बंधित गोपनीय जानकार अपराधी के पास पहुंच जाती है और वह कुछ ही पल में ठगी का शिकार हो जाता है। वहीं कॉलर की पहचान बताने वाले एप पर भी अपनी फर्जी आईडी बनाकर भी दुरुपयोग किया जाने लगे हैं। गौरतलब है कि जिले में साइबर सैल से जुड़ा थाना संचालित नहीं हैं। ऐसे में साइबर अपराध पुलिस के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इसमें पुलिस के पास संसाधनों की कमी भी अपराधियों तक पहुंचने में रोड़ा बनी हुई है। अब तक ऑनलाइन व पेटीएम केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी के दर्जनों मामले घटित हो चुके हैं।
शहर के खण्डेलवाल धर्मशाला के नजदीक निवासी महेश अग्रवाल के पास भी केवाईसी अपडेट कराने का मैसेज आया और मैसेज पर क्लिक करते ही सवा लाख रुपए पार हो गए। आनन-फानन में बैंक जाकर खाता स्टॉप कराना पड़ा।


शिक्षक दिनेश कुमार सेठी निवासी वार्ड 17 के मोबाइल पर भी पेटीएम केवाईसी अपडेट कराने का24 जनवरी 2019 सुबह मैसेज आया और क्लिक करते ही 82 सौ रुपए खाते से पार हो गए। पीडि़त ने थाने पहुंच शिकायत भी दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।


इण्डियन आर्मी दार्जीलिंग में कार्यरत फौजी मानसिंह गुर्जर निवासी झंूपड़ीन के खाते से भी 30 अक्टूबर को 95 सौ रुपए पार हो गए। फौजी भी गत 13 जनवरी से शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने के चक्कर काट रहा है, लेकिन पुलिस भी कार्रवाई का भरोसा दिलाकर लगातार टरकाती जा रही है।
आशापुरा निवासी पवन दडग़स की फेसबुक आईडी हैंग कर ली और फेसबुक दोस्त द्वारा 153 लोगों को पिता के बीमार होने का मैसेज भेजा गया और रुपए पेटीएम व फोन पे में डालने की मांग की। इस पर मित्रों के फोन आने पर पता लगा। इससे मित्र ठगी का शिकार होने से बच गए। हालांकि दो मित्रों 2-2 हजार रुपए डाल भी दिए।

सावधानी व सतर्कता आवश्यक
अनजान व्यक्ति बैंककर्मी बनकर चालू खाते को अपडेट कराने, एटीएम कार्ड नम्बर, पिन, सीवीवी नम्बर या फिर ओटीपी नम्बर मांगता है। उसे खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी नहीं बताकर बैंक में ही जाकर जानकारी लें। एटीएम कार्ड रुपए निकालने के लिए अकेले उपयोग में लेना चाहिए। वहीं एटीएम उपयोग लेते समय किसी अनजान व्यक्ति की मदद नहीं लें और कार्ड किसी भी व्यक्ति को नहीं देना चाहिए। ऐसे एटीएम बूथ का प्रयोग रुपए निकालने के लिए नहीं करना चाहिए। सुनसान जगह पर स्थित एटीएम बूथ से रुपए नहीं निकालें।
राजेन्द्र कुमार मीणा, थाना प्रभारी