ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि बांधों को नुकसान पहुंचने पर बिनोरी, सूरतपुरा, बिलौणा कलां, दौसाड़ा, श्यामपुरा खुर्द, बगड़ी, खुर्रा, किशोरपुरा, महाराजपुरा, भानपुरा, डिवाचली, हमीरपुरा, गुढला, नांवड़, लिवाली, ढोसी, रामसर, खेडला और ककराला सहित कई गांवों में पेयजल व सिंचाई संकट गहरा जाएगा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2001 में सरकार ने करीब पांच करोड़ रुपए खर्च कर दोनों बांधों को एकीकृत कर उनकी क्षमता बढ़ाई थी, लेकिन अब प्रस्तावित सर्वे से उस निवेश और जल संरक्षण प्रयासों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।