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गुर्जर आरक्षण आंदोलन खत्म, आगरा- जयपुर हाईवे से हटाया जाम

पुलिस प्रशासन ने ली राहत की सांस, हाईवे पर लौटी रौनक, दौसा के सिकंदरा व गाजीपुर में छह दिन से लग रहा था जाम
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दौसा

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Mahesh Jain

Feb 16, 2019

गुर्जर आरक्षण आंदोलन खत्म, आगरा- जयपुर हाईवे से हटाया जाम

गुर्जर आरक्षण आंदोलन खत्म, आगरा- जयपुर हाईवे से हटाया जाम

दौसा. सिकंदरा. प्रदेश में छह दिन से चल रहा गुर्जर आरक्षण आंदोलन शनिवार को गुर्जर आरक्षण आंदोलन संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के आह्वान पर खत्म हो गया है। आरक्षण आंदोलन खत्म होने की घोषणा होते ही आमजन के साथ पुलिस व प्रशासन ने राहत की सांस ली है।


दौसा जिले में जयपुर- आगरा हाईवे पर सिकंदरा चौराहे व महुवा - हिण्डौन रोड पर गाजीपुर खावदा मोड़ पर 11 फरवरी से गुर्जर समाज के लोग जाम लगा कर बैठे थे। सिकंदरा में गुर्जर समाज के नेताओं ने समाज के लोगों को सम्बोधित किया। वहीं गाजीपुर में सम्बोधन के बाद जाम खोल दिया है।


उल्लेखनीय है कि गुर्जर समाज के लोगों ने प्रदेश संयोजक बैंसला के निर्देश पर दौसा के सिकंदरा व गाजीपुर में जाम लगाने के बाद सिकंदरा चौराहे के आर्थिक स्थिति पटरी से उतर गई थी। सिकंदरा चौराहे के पत्थर व्यवसाय को पांच दिनों में करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान हो गया।

सिकंदरा चौराहे पर जम से जाम लगा था तभी पूरा बाजार भी बंद था। इससें सैंकड़ों दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित हुआ है। वहीं हाईवे पर संचालित होटल, ढाबे, पेट्रोल पम्पों पर भी कारोबार प्रभावित रहा। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के जाम से न केवल सिकंदरा चौराहे पर ही नुकसान रहा,बल्कि इससे रोडवेज को भी कई लाखों की चपत लग गई।


इधर गुर्जर आरक्षण खत्म होने के बाद जिला व पुलिस प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। यहां पर बड़ी संख्या में पुलिस जाप्ता तैनात रहा। बार से भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अर्दसैनिक बलों की सात कम्पनियां बुलाई गई।

एक नहीं पांच बार जाम का दंश झेल चुका है सिकंदरा चौराहा
सिकंदरा चौराहा एक ही बार नहीं बल्कि पांच बार गुर्जर आंदोलन का दंश झेल चुका है। इससे सिकंदरा चौराहा का बाजार व व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। बार-बार होने वाले गुर्जर आंदोलन से यहां के व्यापारियों की कमर टूट गई है। जाम लगने से देश विदेश में अपनी पहचान बना चुका पत्थर व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो जाता है। हाईवे बंद होने से पत्थर व्यापारियों का तैयार माल बाहर नहीं भेजा जा सकता तथा कच्चा माल भी उपलब्ध नहीं होता है। यहां करीब 5 सौ से अधिक पत्थर नक्काशी की स्टॅालें है, इन पर करीब 5 हजार से अधिक दहाड़ी श्रमिक कार्य करते हैं। गुर्जर आंदोलन से पत्थर व्यवसाय को करीब 50 लाख रुपये प्रतिदिन का नुकासान हो रहा है।