हेला ख्याल संगीत दंगल में भवानी की आराधना

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By: gaurav khandelwal

Published: 10 Apr 2019, 08:14 AM IST

लालसोट. गणगौर उत्सव पर्व पर सोमवार रात स्थानीय हेलाख्याल संगीत मण्डलों ने भवानी पूजन में संगतीमय रचनाओं की फुलझडिय़ां बिखेरकर श्रोताओ को आनन्दित किया तथा राग रागनियां पेश की। मंगलवार सुबह तक चले इस दंगल में सैनी मण्डल, महाकाली मण्डल, पारख मण्डल, गणेश मण्डल, एवं शिव मण्डल ने भाग लेकर भवानी पूजन किया। इसमें गीत संगीत के माध्यम से राजस्थानी ढूंढारी शैली का गायन कर मां भवानी की आराधना की।

 

 

सर्वप्रथम भवानी पूजन में दंगल की शुरुआत सैनी मण्डल के मीडिया पांचूराम सैनी के नेतृत्व में भवानी पूजन के दौरान - कोई सदा भवानी रे, दाहिनी कोई सन्मुख रहत गणेश रे, सुनल जगदम्बे माई है, दंगल में करो सहाई है। गाया। पारख मण्डल के मीडिया प्रकाश सैनी के नेतृत्व में - जय भवानी की अरदास में ,, हे दुर्गे ज्वाला मेरी करे दे पूरण आस, तेरे भरोसे चलर्यो मैया है मोकू विश्वास, गाया।

 

 

गीत संगीत के माध्यम से अम्बे मां की स्तुति करते हुए - अम्बे तुम पर्वतवारी हो, और भूरी सिंह सवारी हो, तुम टेड़े मुख वारी हो, तुम भक्तों की व्यवहारी हो, देखो भक्तों को वरदान गाया। इसी ने गाया, - तुम बसो सभी जगह, आवो जगदम्बे दंगल में, रक्षा की जो मेरी पल में, तेरी समय नहीं कोई बुद्धि बल में, तुम हो जग का आधार, गाया। इसी मण्डल ने गायकी में पौराणिक कथा की शानदार प्रस्तुती दी।जिसे श्रोताओं ने काफी तन्मयता से सुना।

 

 

महाकाली मण्डल के मीडिया नन्द कुमार पांखला के नेतृत्व में मां काली की आराधना के बाद बेलोचंद की एक पौराणिक कथा गीत के माध्यम से सुनाई। गणेश मण्डल के मीडिया ग्यारसीलाल सैनी ने भवानी पूजन में गणेशजी की आराधना कर धार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया। शिव मण्डल के मीडिया अम्बालाल अमावर के सानिध्य में मां भवानी को याद करते हुए धार्मिक प्रस्तुति गायन के माध्यम से पेश की।

 

 

इस तरह भवानी पूजन के संगीत कार्यक्रम में कलाकारों ने लोक वाद्य, ढोल, नंगाड़ों, झांझ मंजीरो, ढोलक चिमटों एवं हार्मोनियम से गज्जर लोकधुन बजाते हुए श्रोताओं को आनन्दित किया। भवानी पूजन संगीत दंगल में स्थानीय श्रोताओं की तादाद बनी रही। इसी के साथ मंगलवार रात्रि से संगीत दंगल पुन: शुरू हो गया, जो अनवरत गुरुवार सुबह तक जारी रहेगा। इसमें स्थानीय एवं बाहर से आने वाली एक दर्जन संगीत पार्टियां अपनी रचनाएं पेश करेंगी। जवाहरगंज परिसर दंगल स्थल पर पाण्डाल में श्रोताओ को बैठने की माकूल व्यवस्था की गई है।(नि.सं.)

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