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राजस्थान के किसान ने अपनाई नई तकनीक, सूखी जमीन पर लहलहाया बेर का बगीचा; हर दिन 15 हजार रुपए की कमाई

Ber Farming Success Story Rajasthan: एक किसान ने खेती में नई तकनीक अपनाकर नई मिसाल पेश की है। सात वर्ष पहले लगाए गए बेर के बगीचे से अब हर साल लाखों रुपए की आय होने लगी है।

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दौसा

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Anil Prajapat

Mar 16, 2026

Jujube Orchard

बेर के बगीचे पर लगाया गया जाल। फोटो: पत्रिका

गुढ़लिया-अरनिया। क्षेत्र की ग्राम पंचायत अरनिया में एक किसान ने खेती में नई तकनीक अपनाकर नई मिसाल पेश की है। सात वर्ष पहले लगाए गए बेर के बगीचे से अब हर साल लाखों रुपए की आय होने लगी है। किसान मथुरेश बिहारी शर्मा ने वर्ष 2019 में बेर की उन्नत खेती से जुड़ी जानकारी ली। कम पानी में भी सफल होने वाली इस फसल को देखते हुए उन्होंने अपने खेत में बगीचा विकसित करने का निर्णय लिया। क्षेत्र में पानी की कमी के बावजूद उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाकर बगीचे को सफलतापूर्वक तैयार किया।

शुरुआत में वे पश्चिम बंगाल जाकर करीब आधा दर्जन से अधिक बागों का अवलोकन कर आए और वहां से लगभग 120 रुपए प्रति पौधे की दर से करीब 400 पौधे खरीदे। इनमें थाई एप्पल, बाल सुंदरी और रेड कश्मीरी बेर की किस्में शामिल हैं। अब बगीचे में बेर की बंपर पैदावार हो रही है।

किसान ने बताया कि वर्तमान में प्रतिदिन 2 से 3 क्विंटल बेर की आवक हो रही है, जिन्हें बांदीकुई, दौसा और अलवर मंडियों में भेजा जाता है। बाजार में बेर 45 से 50 रुपए प्रति किलो तक बिक रहे हैं, जिससे प्रतिदिन करीब बारह से 15 हजार रुपए से अधिक की आय हो रही है।

अन्य किसानों को भी सिखा रहे

शर्मा रोज सुबह चार बजे बगीचे में पहुंचकर पौधों की देखभाल करते हैं। सुबह दस बजे तक निराई-गुड़ाई के बाद घर लौटते हैं और दोपहर में फिर खेत पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि बगीचे में लगातार काम करने से स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है और नई तकनीकों को अपनाने का अवसर भी मिलता है। वे अब अन्य किसानों को भी नि:शुल्क ट्रेनिंग दे रहे हैं।

किसान ने बताया कि कई बाहर तोते फसल को नुकसान पहुंचा देते हैं, इससे बचने के लिए उसने जाल लगवा दिया है। उनके दोनों बेटे सरकारी सेवा में हैं और बाहर रहते हैं, जबकि बेटियों का विवाह हो चुका है। ऐसे में अब वे पूरा समय बगीचे को दे रहे हैं। आसपास के किसान भी बैर की खेती की जानकारी लेने उनके खेत पर पहुंचने लगे हैं।

पत्रिका के एग्रो पेज का फायदा

उन्होंने बताया कि राजस्थान पत्रिका का एग्रो पेज से अनेक किसानों को फायदा मिल रहा है। इसमें किसानों को नई किस्मों, नई तकनीक व नई योजनाओं की जानकारी मिलती है। उसे भी एग्रो पेज का काफी फायदा मिला है। इसके अलावा इंटरनेट से भी काफी जानकारी ली है। उसी आधार पर यह बाग लगाया है।