
लालसोट की मंडी में लगी सौंफ की ढेरियां। फोटो: पत्रिका
दौसा। जिले की लालसोट कृषि उपज मंडी इन दिनों सौंफ की खुशबू से महक रही है, बीते माह सरसों से निपटने के बाद अब मंडी में सौंफ की आवक अब अपने पूरे परवान पर पहुंच चुकी है। इन दिनों लालसोट कृषि उपज मंडी में सौंफ की 3 हजार से अधिक बोरी की आवक बनी हुई है। इसके चलते पूरी मंडी में दिन भर जगह जगह सौंफ की ढेरिया लगी हुई दिखाई देती है और पूरा मंडी क्षेत्र सौंफ की खुशबू से महकता रहता है।
लालसोट मंडी की सौफ की खुशबू व क्वालिटी ने अब देश के साथ विदेशों तक भी पहचान बना ली है और विदेशों से भी लगातार डिमांड होने के चलते मंडी के कारोबार काफी फल फूल रहा है। आढ़तियों का कहना है कि शादी समारोह के कारण आवक थोड़ी कम जरूर पड़ी है, लेकिन अब दोबारा आवक जोर पकड़ने की उम्मीद है। कुल मिलाकर यह मंडी सौंफ व्यापार के लिए एक प्रमुख केंद्र बन चुकी है और अब इसका विस्तार अन्य बड़े व्यापारिक केंद्रों के समकक्ष माना जा रहा है, जिससे इसका महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्र के किसान अब परम्परागत की जगह मसाला खेती ज्यादा कर रहे हैं। हर साल रकबा बढ़ता जा रहा है। इससे किसानों का जीवन स्तर सुधरने लगा है। वे अपनी कड़ी मेहनत से खुद अपनी तकदीर बदल रहे हैं।
मंडी में इस समय अधिकतर सौंफ कमजोर गुणवत्ता की पहुंच रही है, जिससे दामों में भी भारी अंतर देखने को मिल रहा है। यहां सौंफ के दाम लगभग 6000 से 18000 रुपए प्रति क्विंटल तक रहे हैं, लेकिन कमजोर गुणवत्ता के कारण अधिकांश बिक्री कम दामों पर ही हो रही है, जिससे किसानों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत भी नहीं निकल पा रही है। प्रति इकाई क्षेत्र में उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम हो गया है, जबकि खर्च वही बना हुआ है। ऐसे में उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापारिक वर्ष कारोबार
सन 2011-12 में 39555
सन 2012-13 में 69286
सन 2013-14 में 15936
सन 2014-15 में 9617
सन 2015-16 में 16443
सन 2016-17 में 32257
सन 2017-18 में 36157
सन 2018-19 में 31913
सन 2019-20 में 41281
सन 2020-21 में 40046
सन 2021-22 में 26185
सन 2022-23 में 31122
सन 2023-24 में 18888
सन 2024-25 में 61300
इस मंडी की सौंफ की गुणवत्ता और सुगंध ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है। अब इसकी मांग केवल देश के विभिन्न हिस्सों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहुंच चुकी है। हालांकि एक विशेष पर्व के कारण एक दिन की आवक में थोडी कमी देखी गई, लेकिन आगामी दिनों में आवक फिर से तेजी पकड़ने की संभावना जताई जा रही है। इस वर्ष सौंफ की फसल को मौसम और रोगों से भारी नुकसान हुआ है।
शुरुआत में रोगों के प्रकोप और बाद में कटाई के समय हुई अनियमित बारिश ने फसल की गुणवत्ता को काफी प्रभावित किया है। अनुमान के अनुसार लगभग आधी फसल खराब हो गई है। बारिश के कारण अधिकांश सौंफ का रंग काला पड़ गया है, जिससे उसकी गुणवत्ता कमजोर हो गई है और बड़ी औद्योगिक इकाइयों की मांग भी प्रभावित हुई है।
Published on:
23 Apr 2026 01:29 pm
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