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Rajasthan: लोकार्पण-शिलान्यास समारोहों में नहीं बुलाने से सांसद मुरारीलाल मीना नाराज, दौसा MLA भी उठा चुके मुद्दा

Murarilal Meena: विकास कार्यों के शिलान्यास व लोकार्पण समारोहों में नहीं बुलाने से दौसा सांसद मुरारीलाल मीना नाराज हैं।

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दौसा

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Anil Prajapat

Nov 27, 2025

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दौसा सांसद मुरारीलाल मीना। फोटो: पत्रिका

दौसा। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत हो रहे विकास कार्यों के शिलान्यास व लोकार्पण समारोहों में नहीं बुलाने व पट्टिकाओं पर नहीं जोड़े जाने से दौसा सांसद मुरारीलाल मीना स्थानीय सरकारी अधिकारियों के रवैये से नाराज हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष व प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही केन्द्रीय निधि से संचालित विकास कार्यों की पट्टिकाओं में सांसद का नाम अंकित करने तथा कार्यक्रमों में आमंत्रण सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

इस पर अब जिला कलक्टर ने समस्त जिला अधिकारियों को आदेश जारी कर हिदायत दी है कि जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करना सुनिश्चित किया जाए। कलक्टर ने नाराजगी भी जताई है कि पूर्व में प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने परिपत्र जारी कर रखा है। इसके बावजूद शिकायतें मिलने से स्पष्ट है कि अधिकारी राज्य सरकार के आदेशों की पालना में लापरवाही बरत रहे हैं, जो अत्यंत गंभीर विषय है।

इससे पूर्व सांसद मुरारीलाल मीणा ने बताया कि संसद में मांग, मंत्रियों के साथ पत्राचार, बैठकें और प्रयासों के माध्यम से कई योजनाओं को दौसा संसदीय क्षेत्र में स्वीकृत कराया गया है, लेकिन दुर्भाग्यवश उन कार्यों की पट्टिकाओं पर उनका नाम नहीं जोड़ा जा रहा है और न ही उद्घाटन कार्यक्रमों में आमंत्रण भेजा जा रहा है, जो अत्यंत खेदजनक है। उनके संज्ञान में आया कि इन कार्योँ की उद्घाटन पट्टिकाओं पर जो सिर्फ लोकसभा या विधानसभा उम्मीदवार रहे हैं, उनके नाम अंकित किए जा रहे हैं। जबकि वर्तमान में क्षेत्र के वे निर्वाचित सांसद हैं। यह स्थिति न केवल प्रोटोकॉल के खिलाफ है, बल्कि संसदीय मर्यादा एवं परंपराओं के भी प्रतिकूल है।

सांसद ने कहा कि यदि भविष्य में भी इस प्रकार की लापरवाही देखने को मिलती है तो मुझे अधिकारियों की इस चूक का विषय संसद की विशेष अधिकार समिति के समक्ष उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। जिम्मेदारों पर कार्रवाई कराई जाएगी। गौरतलब है कि गत दिनों गुढ़ाकटला सहित अन्य जगह लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रमों में अतिथि के रूप में भाजपा नेताओं को ही बुलाया गया, जबकि सांसद को आमंत्रण तक नहीं भेजा गया। पट्टिकाओं पर भी चुनाव में हारे प्रत्याशियों का नाम लिखा गया है।

राजनीतिक दबाव या अधिकारियों की मनमानी!

विकास कार्यों के शिलान्यास व लोकार्पण समारोहों में अतिथि बुलाने को लेकर अधिकारी इन दिनों उलझन में हैं। सूत्रों ने बताया कि सत्तारूढ़ दल भाजपा के नेताओं का दबाव रहता है कि कार्यक्रमों में कांग्रेस के नेता नहीं होने चाहिए। वहीं सांसद व दौसा विधायक कांग्रेस से हैं। खासकर दौसा विधानसभा क्षेत्र और जिला मुख्यालय पर होने वाले कार्यक्रमों को लेकर राजनीति हावी रहती है। यहां सांसद-विधायक के अलावा सभापति व प्रधान भी कांग्रेस के हैं, जबकि अधिकारियों व कार्मिकों के तबादलों व सरकार में भाजपा नेताओं की चल रही है। ऐसे में नियमों को दरकिनार कर कई कार्यक्रमों में कांग्रेस से चुने गए जनप्रतिनिधियों को अफसरों ने नहीं बुलाया, जिसकी शिकायतें अब उच्च स्तर तक पहुंच गई हैं।

दौसा विधायक भी उठा चुके मुद्दा

गत दिनों दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा ने भी सरकारी आयोजनों में आमंत्रित नहीं करने का मुद्दा उठाया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे, क्योंकि बूटोली व मूसोलाई में स्कूलों के कार्यक्रम में उनकी जगह भाजपा नेता को अतिथि बनाया। दौसा विधायक ने आरोप लगाते हुए कहा था कि विधायक के अधिकारों का हनन हो रहा है।