
'मां' बनना पड़ रहा जान पर भारी
दौसा. जिले में पांच दर्जन सरकारी अस्पताल होने के बाद भी केवल एक जिला अस्पताल में ही सिजेरियन प्रसव हो पा रहा है। जबकि सरकारी अस्पतालों से अधिक सिजेरियन डिलेवरी तो निजी अस्पतालों में हो रही है। उपखण्ड स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी सिजेरियन प्रसव नहीं होने से गंभीर स्थिति में तड़पती गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल या फिर जयपुर रैफर करना पड़ रहा है।
चिकित्सा सूत्रों के अनुसार वर्ष 2017-18 में जिले में 1172 सिजेरियन डिलेवरी हुई है। इसमें से 593 महिलाओं के ऑपरेशन निजी अस्पतालों में हुए हैं। जबकि जिला अस्पताल को छोड़ कर जिले में केवल 5 सिजेरियन हुए हैं। इसमें करीब 10 वर्ष बाद बांदीकुई सीएचसी में एक एवं महुवा में 4 सिजेरियन प्रसव हुए हैं।
सिकराय एवं लालसोट उपखण्ड में तो एक भी सिजेरियन ऑपरेशन नहीं हुआ है। मजबूरी में प्रसूता के परिजनों को जेब से मोटी रकम खर्च कर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को उठानी पड़ रही है, लेकिन चिकित्सा विभाग जानकर भी अनजान बना हुआ है।
यहां ऑपरेशन मतलब परेशानी
जिला अस्पताल के मातृ एवं शिशु कल्याण केन्द्र में ऑपरेशन थियेटर अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में ऑपरेशन के लिए महिला को मुख्य भवन में ले जाना पड़ता है। इसके बाद वापस क्षतिग्रस्त सड़क से स्टे्रचर पर मातृ शिशु कल्याण केन्द्र में लाया जाता है। ऐसे में महिला एवं परिजनों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। जबकि गत वर्ष में ही यहां 574 सिजेरियन प्रसव हुए हैं। स्टाफ की कमी एवं लक्ष्य के मुकाबले अधिक प्रसव होने से संसाधनों की कमी अखरती है। लोगों की मांग है कि जिला अस्पताल की स्थिति में सुधार किया जाए।
विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं
सिजेरियन डिलेवरी के लिए सर्जन, शिशु रोग विशेषज्ञ, निश्चेतन विशेषज्ञ व महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ होने चाहिए, लेकिन जिला अस्पताल के अलावा सर्जन के 15 स्वीकृत पदों के मुकाबले एक, स्त्री रोग के 6 में से 2 एवं शिशुरोग के 6 में से एक चिकित्सक ही कार्यरत है। पद विरुद्ध चिकित्सक लगाकर काम चलाया जा रहा है।
वर्ष 2017-18 में सिजेरियन डिलेवरी की स्थिति
ब्लॉक निजी अस्पताल सरकारी अस्पताल
बांदीकुई 326 1
दौसा 246 0
लालसोट 0 0
महुवा 0 4
सिकराय 21 0
जिला अस्पताल 574
सिजेरियन के लिए चार चिकित्सकों की टीम होना जरूरी है
जहां पर सिजेरियन से प्रसव होता है वहां पर सर्जन, शिशु रोग विशेषज्ञ, निश्चेतन विशेषज्ञ व महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ यानि इन चारों चिकित्सकों की टीम होनी चाहिए तभी जाकर ऑपरेशन हो पाते हैं। बांदीकुई में है, लेकिन चिकित्सक रिटायरमेंट के नजदीक है वह रुचि नहीं ले रहा है। महुवा में स्थिति काबू में आ जाएगी।
डॉ. रामफल मीना, सीएमएचओ दौसा
Published on:
21 Jul 2018 07:42 am
