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दौसा के सरकारी अस्पताल में हैरान कर देने वाला मामला, मरीज को कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा; वीडियो वायरल

Government Hospital Dausa: दौसा के सरकारी अस्पताल में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज के साथ स्टाफ ने बेरहमी से मारपीट की। जानिए आखिर क्यों शुरू हुआ विवाद?

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दौसा

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Anil Prajapat

Mar 27, 2026

Ramkaran Joshi Government District Hospital-1

सरकारी अस्पताल में मरीज से झगड़ता कर्मचारी व इनसेट में गेट बंद करता गार्ड। फोटो: पत्रिका

दौसा। रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए आए एक मरीज व वहां के स्टाफ में मारपीट हो गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमे कुछ कर्मचारी एक जने को पहले पीटते हुए बाद में घसीटकर कमरे में ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

दौसा निवासी नंदलाल ने बताया कि उसे पथरी के कारण दर्द हो रहा था। गुरुवार सुबह इलाज के लिए जिला हॉस्पिटल पहुंचा था। यहां डॉक्टर ने जांच के बाद उसे इंजेक्शन लिखा। उसने स्टाफ से जल्दी ट्रीटमेंट के लिए कहा तो विवाद हो गया। मरीज ने आरोप लगाया कि उसके बार-बार जल्दी ट्रीटमेंट की कहने पर स्टाफ नाराज हो गया। इसके बाद गार्ड और स्टाफ ने उसके साथ मारपीट की। उसे एक कमरे में बंद कर वहां भी पीटा गया। वह बचाने के लिए चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।

पीएमओ आरके मीणा बोले- मामले की जांच जारी

दौसा जिला अस्पताल के पीएमओ आरके मीणा ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा कि गलती किसकी थी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, कोतवाली के एसआई हरि सिंह बताया- दोनों पक्ष थाने आए थे। फिलहाल किसी भी पक्ष ने लिखित शिकायत नहीं दी है। आपसी बातचीत के बाद वे चले गए। वहीं बाद में दोनों पक्षों ने बताया कि सब कुछ गलतफहमी में हो गया।

लोग बोले- क्यों बने मारपीट के हालात?

गुरुवार को जिला अस्पताल में मरीज व कर्मचारी में मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद जिलेवासी यहां नियमित निरीक्षण करने व लापरवाहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग उठा रहे हैं। लोगों का कहना है गलती चाहे मरीज की रही हो या कर्मचारी की। लेकिन ऐसे हालात क्यों बने? इसकी निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।

अस्पताल में पहले भी कई बार हो चुका हंगामा

रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय में पहले भी कई बार हंगामा हो चुका। इसे अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही माने या जिला प्रशासन का कमजोर नियंत्रण। कारण चाहे जो भी अस्पताल अव्यवस्थाओं को लेकर कई बार चर्चा में आ चुका। जून 2019 में अव्यस्थाओं के चलते यहां तत्कालीन एनएचएमच निदेशक डॉ समित शर्मा ने निरीक्षण किया था। इस दौरान लापरवाही उजागर होने पर सात कर्मचारियों को निलम्बित किया गया था। फिर भी हालात नहीं सुधर रहे। मरीजों का कहना है जिला प्रशासन के अधिकारी नियमित रूप से सरकारी अस्पताल का औचक निरीक्षण करें तो व्यवस्थााओं में सुधार हो सकता है।

बन चुके सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाण पत्र

दौसा के सरकारी अस्पतालों में फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण पत्र बनाकर लाखों रुपए उठाने का मामला सामने आ चुका। इस गड़बड़ी के चलते राज्य सरकार ने 9 डॉक्टरों और 11 चिकित्सा कर्मियों को एपीओ कर दिया था। इस मामले में दौसा जिला अस्पताल के अलावा अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की संलिप्तता भी पाई गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दौसा दौरे के दौरान पिछले माह इस मामले की निष्पक्ष जांच कर निलम्बन करने की बात कही थी।