
बाजार से खरीदकर लगवाने पड़ रहे हैं रेबीज के इंजेक्शन
बांदीकुई. यदि किसी का श्वान काटे ले या फिर बंदर जख्मी कर दे और मरीज उपचार के लिए राजकीय चिकित्सालय पहुंचे तो उसे जेब ढीली करके ही उपचार कराना पड़ेगा। यहां राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय में आने वाले रेबीज के इंजेक्शन मरीजों के आउटडोर के हिसाब से कम आते हैं। ऐसे में सप्लाई होने के 15 दिवस में ही खत्म हो जाते हंै। मंगलवार को भी मात्र 80 इंजेक्शन भेजे हैं। जो कि ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। मजबूरन मरीज को साढ़े तीन सौ रुपए खर्च करके बाजार से इंजेक्शन खरीदकर उपचार कराना पड़ता है।
सूत्रों के मुताबिक राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय में जनवरी से दिसंबर तक 2018 तक कुल करीब 5 हजार रेबीज के इंजेक्शन लगे हैं। जबकि सालभर में औसतन करीब डेढ़ हजार से अधिक मरीज बाजार से इंजेक्शन खरीदकर उपचार करा चुके हैं। राजकीय चिकित्सालय में रेबीज का इंजेक्शन नि:शुल्क लगाया जाता है। गत 31 दिसम्बर 2018 को रेबीज के इंजेक्शन की सप्लाई हुई थी।
इंजेक्शन खत्म हुए कई दिन बीत गए, लेकिन अभी तक सप्लाई नहीं हो सकी है। जबकि बाजार से खरीदने पर करीब साढ़े तीन सौ रुपए का आता है। इससे सरकार की ओर से संचालित इस योजना का आमजन को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मरीज आमजन को कोसते दिखाई देते हैं। जबकि ये रेबीज के इन्जेक्शन बंदर, कुत्ता, बिल्ली, सियार सहित अन्य जानवरों के काटने पर काम में लिए जाते है और यह इंजेक्शन तीन बार लगता है।
सालभर में 4962 इंजेक्शन की हुई सप्लाई
चिकित्सालय सूत्रों के मुताबिक एक वर्ष में 4962 इंजेक्शनों की सप्लाई हुई थी। इसमें जनवरी 2018 में 555, फरवरी में 580, मार्च में 565, अप्रेल में 391, मई 434 ,जून मेंं 381, जुलाई 423, अगस्त 369, सितंबर 317, अक्टूबर 366, नवंबर 359, दिसंबर 225 इन्जेक् शन काम आ चुके हैं। ऐसें में मरीजों के आउटडोर को देखते हुए सप्लाई बढ़ानी चाहिए। इससे मरीजों को योजना का समुचित लाभ मिल सके। (नि.सं.)
बंदरों के आतंक से परेशान हैं लोग
शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक के चलते लोगों को मकान की चारदीवारी में कैद रहना पड़ रहा है। बंदर मकान की छतों, आम रास्तों में एवं मुख्य बाजार में विचरण करते रहते हैं। जो कि आए दिन लोगों पर हमला कर जख्मी कर देते हैं। हालात ये हैं कि बंदरों के डर से लोगो ने छतो में जाना तक बंद कर दिया है। पालिका प्रशासन भी कार्रवाई के नाम पर आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।
इससे शहरवासियों में पालिका के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है। राहगीरों के हाथ से सामान तक बंदर छीन ले जाते हैं। मण्डी में फलों को उठाकर ले जाते हैं। महिलाएं पूजा-अर्चना के लिए मंदिर जाने में भी हिचकिचाहट महसूस करती हैं। (नि.स.)
कम संख्या में मिलते हैं
रेबीज के इंजेक्शन आगे से मांग के मुताबिक नहीं आते हैं। सप्लाई कम आने के कारण शोर्ट पड़ जाते हैं। बाद में डिमाण्ड करने पर आते हैं। मंगलवार को भी मात्र 80 इंजेक्शन आए हैं। जबकि मरीजों के आउटडोर के हिसाब से कम हैं।
डॉ. रामनिवास मीणा, चिकित्सालय प्रभारी बांदीकुई
Updated on:
21 Jan 2019 08:31 am
Published on:
21 Jan 2019 08:31 am
