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Success Story: सरकारी स्कूल में पढ़ाई, 9 बार सरकारी नौकरी, फिर बनीं SDM, जानें RAS संजू मीणा की सफलता की कहानी

SDM Sanju Meena Success Story: दौसा की उपखंड अधिकारी संजू मीणा का कहना है कि बचपन से ही सपना था करूंगी तो केवल सिविल सेवा ही। इसलिए नौ बार चयन होने के बावजूद सरकारी नौकरी नहीं की।
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दौसा

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Anil Prajapat

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Updated: 8 Mar 2026, 12:15 PM IST

SDM Sanju Meena

आरएएस संजू मीणा। फोटो: पत्रिका

दौसा। पहली से लेकर बारहवीं कक्षा तक गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ी। इसके बाद स्नातक व स्नातकोत्तर की पढाई भी सरकारी कॉलेज में की। बचपन से ही सपना था करूंगी तो केवल सिविल सेवा ही। इसलिए नौ बार चयन होने के बावजूद सरकारी नौकरी नहीं की। मां गौरा देवी व पिता रामनारायण मीणा ने हमेशा आगे बढ़ने व मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। यह कहना है राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिकारी वर्तमान में दौसा की उपखंड अधिकारी संजू मीणा का।

आमेर के निकट चंदवाजी में अप्रैल 1990 में जन्मी संजू ने बताया बारहवीं के बाद बीए महारानी कॉलेज जयपुर से किया। एमए, पीएचडी व एमफिल राजस्थान विवि जयपुर से की। पहली से लेकर एमए तक हमेशा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। एसएससी, सीजीएल व बैंक पीओ सहित नौ जगह सरकारी सेवा में चयन हो गया, लेकिन सिविल सेवा के सपने के चलते नौकरी नहीं की।

दिसम्बर 2016 में आरएएस का परिणाम आया। एसटी में पूरे राजस्थान में चौथी रेंक रही। 11 सितम्बर 2017 को मेहनत के फल का वह दिन भी आया जब आरएएस पद की ट्रेनिंग शुरू हुई तो खुशी से आंखें छलक उठी। उसे आगे बढ़ाने के लिए बड़ी बहन मंजू, भाई रमेश व संतोष ने हमेशा प्रेरित किया। मां साक्षर है, लेकिन उसने शिक्षा का महत्व बताया। माता-पिता ने कभी बेटे व बेटी में भेदभाव नहीं किया।

सास-ससुर करते हैं सपोर्ट

रैनी, मसूदा और भिनाय में एसडीएम सहित कई पदों पर रह चुकी संजू के पति लोकेश मीणा राजस्थान पुलिस में नीमकाथाना में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हैं। दो छोटे बच्चों के साथ उपखंड अधिकारी जैसे पद को सभालना चुनौतीपूर्ण रहता है, परन्तु शाम को बच्चों के मुस्कराते चेहरे देखकर सारी थकान उतर जाती है।

सास-ससुर पूरा सपोर्ट करते हैं। औरत ही औरत की परेशानियों को समझ सकती है। मुझे ऑफिस जाने के बाद पीछे से कभी बच्चों की चिंता नहीं रहती है. क्योंकि बच्चों को हमेशा सास ने सम्भाला है।

लक्ष्य तय करें, नशे से दूर रहें

सबसे पहले लक्ष्य तय करें कि क्या बनना है या क्या करना है। इसके बाद ईमानदारी से नियमित मेहनत शुरू कर दें, देर से ही सही, लेकिन सफलता जरूर मिलेगी। नशे से दूर रहें, यह कई परिवारों को बर्बाद कर देता है। जिस विषय पर अच्छी पकड़ है उसे और मजबूत करें।

दसवीं के बाद अपनी रूची व भविष्य को ध्यान में रखते हुए विषय का चयन करें। यह नहीं समझें कि सरकारी स्कूल वाले या हिन्दी माध्यम वाले कमजोर होते हैं। मैं सरकारी स्कूल में पढी और माध्यम भी हिन्दी रहा।