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शिक्षा के मंदिर का हाल…स्कूल का भवन जर्जर, समाजकंटकों का अड्डा

राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बास गुढ़लियाभवन की कमी से शिक्षण व्यवस्था बाधित
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State High School, Bas Guadlia Lack of building disrupts teaching syst

शिक्षा के मंदिर का हाल...स्कूल का भवन जर्जर, समाजकंटकों का अड्डा

गुढ़लिया. ग्राम पंचायत गुढ़लिया के बास गुढ़लिया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में भवन की कमी अखर रही है। विद्यालय परिसर स्थित जर्जर भवन में समाजकंटक शराब पीकर बोतलें बिखेर जाते हैं, लेकिन शिक्षा विभागीय अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
जानकारी के अनुसार इस विद्यालय में नौ कक्षा-कक्ष बने हुए हैं। इनमें से तीन कक्षा-कक्ष पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, लेकिन इन्हें पीडब्ल्यूडी की ओर से कण्डम भी घोषित नहीं किया जा रहा है। इनमें हादसे का अंदेशा होने के कारण बच्चों को बिठाना तक बंद कर दिया है। इन कक्षों के दरवाजे नहीं होने के कारण मौका देखकर समाजकंटक आ जाते हैं। जो शराब पीकर बोतलें भी वहीं फेंक जाते हंै।
इसके अलावा 6 कक्षा कक्षों में से एक कक्ष प्रधानाध्यापक, एक कम्प्यूटर कक्ष, एक स्टोर रूम के काम आ रहा है। ऐसे में मात्र तीन कक्षों में ही 8 कक्षाओं को बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ती है। इसमें भी कक्षा 1 से 5वीं तक के विद्यार्थियों को एक कक्ष में बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ती है। इससे बच्चों की पढ़ाई तक बाधित हो रही है। जबकि कुछ कक्षा-कक्षों में बारिश के दिनों में छत से पानी रिसाव तक होता है।


घटता जा रहा है नामांकन
इसके चलते बच्चों का नामांकन भी घटता जा रहा है। वर्ष 2016 में छात्र नामांकन 76 एवं वर्ष 2017 में घटकर 43 रह गया और वर्ष 2018 में इससे भी घटकर मात्र 36 का नामांकन रह गया है। यदि शिक्षा विभाग की ओर से सुविधाओं में इजाफा नहीं किया गया तो यह विद्यालय बंद होने के कगार पर पहुंच जाएगा।

इस विद्यालय में रसोईघर का भी अभाव है। ऐसे में टीनशैड के नीचे पोषाहार पकाना पड़ता है। टीनशैड भी अधूरी होने के कारण बारिश के दिनों में पानी की बौछार तक आती हैं। खुले में पोषाहार पकाए जाने से साफ-सफाई रखना भी मुश्किल हो रहा है। विद्यालय में लगे हैण्डपम्प खराब होने के कारण पानी की समस्या बनी हुई है। ऐसे में स्कूल प्रशासन ने सीमेंट की टंकी का निर्माण कराकर कैम्परों में पानी भरकर बच्चों की प्यास बुझानी पड़ती है। कार्यवाहक प्रधानाध्यापक लक्ष्मी चौधरी का कहना है कि इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करा रखा है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।