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बस स्टैण्ड की जमीन अब हुई सरकारी सम्पत्ति

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lalsot bus stand

बस स्टैण्ड की जमीन अब हुई सरकारी सम्पत्ति

दौसा. शहर के लालसोट रोड गंगापुर बस स्टैण्ड की बेशकीमती भूमि का फैसला आखिरकार जनता के हित में ही आ गया है। यह जमीन अब भूमाफियाओं से पूरी तरह से मुक्त हो गई है। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मुनीश्वरनाथ भण्डारी व जीआर मूलचंदानी की डबल बैंच ने गीतादेवी की अपील को खारिज कर दिया।


जमीन का यह था मामला


पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सुरेश घोषी ने बताया कि 1959 में टाउन इन्प्रोमेंट बोर्ड ने गांधी तिराहे के समीप करीब 1160 वर्गगज भूमि को गंगापुर बस स्टैण्ड के नाम आवंटित की थी। उस वक्त बस स्टैण्ड यूनियन के तत्कालीन अध्यक्ष ने टाउन इन्प्रोमेंट बोर्ड (अब नगरपरिषद) को शपथ पत्र दिया था कि यह भूमि बस स्टैण्ड के ही काम आएगी, इसको किसी दूसरे काम नहीं लिया जाएगा। 1996 तक बस स्टैण्ड चलता रहा। 1996 में इस भूमि की कुछ लोगों ने रजिस्ट्री करा ली, लेकिन 1993 से तत्कालीन कलक्टर ने रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी, इसलिए यह भूमि उन लोगों के नाम रजिस्टर्ड नहीं हो पाई। लेकिन 37 लोगों ने नगरपालिका में आवेदन पेश किए कि इस भूमि को वाणिज्यिक काम में लिया जाए और बस स्टैण्ड के लिए दूसरी जगह भूमि आवंटित की जाए।


इसके बाद 30 मई 2000 को नगरपालिका में प्रस्ताव लिया गया। 26 फरवरी 2001 सार्वजनिक रूप से विज्ञप्तियां जारी कर आपत्तियां मांगी गई। इस बीच वर्ष 2001 में नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन सुरेश घोषी ने नगरपालिका अधिनियम के तहत जिला कलक्टर को आवेदन प्रस्तुत कर इस भूमि का मूल पट्टा, नगरपालिका का प्रस्ताव व आम सूचना आदि को निरस्त करने की अपील की।

इस पर तत्कालीन जिला कलक्टर ने 25 अप्रेल 2001 को इस भूमि पर स्थगन आदेश जारी कर दिए। 26 जुलाई 2004 को इस भूमि का मूल पट्टा, आवंटन एवं प्रस्ताव निरस्त कर दिया। इसके बाद इस भूमि पर एक दर्जन लोगों ने अलग-अलग याचिकाएं लगा कर जिला कलक्टर के आदेश को चुनौती दी थी।


सार्वजनिक रूप से काम आएगी भूमि


इधर, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन सुरेश घोषी ने पत्रकारों को बताया कि यह दौसा की जनता की जीत है। जनता की इस जमीन की लड़ाई के लिए करीब 25 वर्ष से लड़ाई लड़ रहे हैं। यह भूमि सार्वजनिक काम ही आएगी। भले ही इसमें बस स्टैण्ड नहीं चले, लेकिन यह आम लोगों के पार्किंग के काम आ सकती है। वर्तमान में अनुमानित कीमत करीब 10-12 करोड़ रुपए है। उनकी ओर से हाईकोर्ट में अधिवक्ता नवलसिंह सिकरवार थे। इधर नगरपरिषद उपसभापति वीरेन्द्र शर्मा ने बताया कि इस भूमि को सार्वजनिक काम के लिए वे जिला कलक्टर से मिलेंगे।