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बिना मान्यता स्कूल संचालित मिली, अधिकारियों ने की जांच

- रेटा गांव के मोरण्डया ढाणी का मामला
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बिना मान्यता स्कूल संचालित मिली, अधिकारियों ने की जांच

बिना मान्यता स्कूल संचालित मिली, अधिकारियों ने की जांच

सिकंदरा.
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते क्षेत्र में निजी स्कूल संचालक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कुछ लोग बिना मान्यता के सैकएडरी तक स्कूल चलाकर बालको ंके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। ऐसा ही एक मामला रेटा गांव की मोरण्ड्या ढाणी में सामने आया है। सिकराय मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मोहन लाल बैरवा व अतिरिक्त ब्लाक शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र मीना ने मंगलवार सुबह निरीक्षण के दौरान रेटा की मोरण्ड्या ढाणी में विद्या आदर्श पब्लिक स्कूल के नाम से बिना मान्यता के कक्षा 10 वीं तक कक्षाएं संचालित पाई है। औचक निरीक्षण से स्कूल स्टाफ में हडक़ंप मच गया। जब अधिकारियों ने संचालक मुकेश डोई से स्कूल की मान्यता के कागजात दिखाने के लिए कहा तो संचालक हड़बड़ा गया। इस दौरान संचालक किसी भी प्रकार के स्कूल के दस्तावेज नहीं दिखा सका।
सीबीओ मोहनलाल बैरवा ने बताया कि रेटा में बिना मान्यता के स्कूल चलने की कई बार शिकायत मिल रही थी। जिसका मंगलवार को मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो स्कूल में कक्षा एक से 10 वीं तक कक्षाएं संचालित मिली है। कक्षाएं बिना मान्यता के चला रखी हैं। उन्होंने बताया कि संचालक द्वारा खेत में टीनशैड डालकर फर्जी तरीके से स्कूल का संचालन किया जा रहा था। जो कि नियमों के विरुद्ध है। निरीक्षण में पता चला की स्कूल में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं की टीसी महर्षि शिक्षा सदन माध्यमिक स्कूल पीचूपाड़ा के नाम से काटकर दी जा रही है। जो कि पूरी तरह से गलत है। बिना मान्यता स्कूल चलाने पर संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया है।

अब सिलिकोसिस पीडि़त के बच्चे होंगे पालनहार योजना में शामिल
-शिक्षा की मुख्यधारा से जुडऩे के लिए मिलेगा आर्थिक सम्बलन
बांदीकुई. सिलिकोसिस बीमारी से ग्रसित मां-बाप के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए पालनहार योजना का लाभ मिल सकेगा। इसके लिए हाल ही में सरकार ने आदेश जारी किए हैं। इसमें सिलिकोसिस बीमारी से पीडि़त व्यक्ति के लिए आय सीमा भी निर्धारित नहीं है। अभ्यर्थी को इसके लिए सिलिकोसिस बीमारी से पीडि़त होने के सम्बंध में प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इससे सिलिकोसिस पीडि़त के बच्चों को आर्थिक सम्बलन मिल सकेगा। पालनहार योजना के लिए भामाशाह कार्ड, मूल निवास, आधार कार्ड एवं आंगनबाड़ी केन्द्र या फिर विद्यालय में अध्ययनरत होने का प्रमाण पत्र लेकर ई मित्र पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
जहां ओटीपी से आवेदन का सत्यापन होगा। योजना के तहत 0 से 6 वर्ष तक 5 सौ प्रतिमाह एवं 6 से 18 वर्ष तक एक हजार रुपए प्रतिमाह एवं 2 हजार रुपए वार्षिक अतिरिक्त एक मुश्त देय हैं। दौसा जिले में अब तक सैकड़ों की संख्या में सिलिकोसिस से पीडि़त लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी से ग्रसित होने पर जमा की गई पूंजी भी उपचार में खर्च हो जाती है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई एवं पालन पोषण का संकट खड़ा हो जाता है। मजबूरन बच्चों को पढ़ाई छोडऩे को मजबूर होना पड़ता है।
ऐसे में सरकार की ओर से पालनहार योजना में शामिल किए जाने से आर्थिक रूप से कुछ राहत मिल सकेगी। गौरतलब है कि सिकंदरा में पत्थर व्यवसाय काफी बड़े स्तर पर संचालित है। जहां लम्बे समय से पत्थर नक्काशी का काम करने में मजदूर जुटे हुए थे। जहां धूल उडऩे से लोग सिलिकोसिस से पीडि़त हो गए। हालांकि सरकार ने भी सिलिकोसिस कार्ड जारी कर उपचार करने एवं मौत होने पर आर्थिक सहयोग दिए जाने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रखी हैं।