शिक्षकों की कमी पर ग्रामीणों का फूटा रोष, स्कूल पर जड़ा ताला

शिक्षकों की कमी पर ग्रामीणों का फूटा रोष, स्कूल पर जड़ा ताला

Gaurav Kumar Khandelwal | Publish: Jul, 14 2018 07:46:27 AM (IST) Dausa, Rajasthan, India

अध्यापक लगाने का भरोसा देकर मामला शांत कराया।

लालसोट. शहर के वार्ड 13 स्थित कैमला की ढाणी केे राजकीय उ'च प्राथमिक विद्यालय गांधीशाला में शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सुबह फूट पड़ा। दर्जनों ग्रामीणों ने विद्यालय खुलने से पूर्व ही तालाबंदी कर दी। बाद में मौके पर पहुंचे बीईईओ रामकिशोर मीना ने एक अध्यापक की तत्काल नियुक्ति करने व सोमवार से एक अन्य अध्यापक को लगाने का भरोसा देकर मामला शांत कराया।

 


सुबह वार्ड पार्षद रामप्रसाद सैनी, पुखराज सैनी, चौथमल सैनी, मुरारीलाल, विनय शर्मा, कालू शर्मा, गिर्राज सैनी, श्रीनारायण सैनी, नागगराम सैनी समेत दर्जनों लोग विद्यालय पहुंच गए और शिक्षकों की कमी को दूर करने की मांग करते हुए प्रवेश द्वार पर ताला जड़ दिया। प्रधानाध्यापक मनोज गर्ग, मुकेश पुरोहित समेत सभी अध्यापकों ने लोगों से विद्यालय का ताला खोलने का आग्रह भी किया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने।

 

बीईईओ कार्यालय से दो प्रतिनिधियों ने भी आकर समझाने का प्रयास किया तो उन्हें लोगों ने बताया कि विद्यालय में स्वीकृत नौ पदों से तीन पद लंबे समय से रिक्त हैं। कार्यरत अध्यापकों को कार्यालयों व अन्य स्कूल में प्रतिनियुक्ति पर लगा रखा है। इस बारे में कई बार शिक्षा अधिकारी व उपखण्ड अधिकारी को भी ज्ञापन दे चुके हैं।

 


दो जगह संचालित


इस विद्यालय में दो साल पूर्व तीन किमी दूर सेडूलाई कॉलोनी के राउप्रावि को मर्ज कर दिया। वह स्कूल सेडूलाई कॉलोनी में ही संचालित हो रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि एक शिक्षक को वहां पर नियुक्त कर रखा है और प्रधानाध्यापक भी आधे समय वहीं पर ड्यूटी देते हंै।

 


बीईईओ ने एफआईआर दर्ज कराने की दी चेतावनी तो लोगों ने सुनाई खरी-खोटी


मौके पर पहुंचे ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रामकिशोर मीना ने कड़ा रुख अपनाते हुए विद्यार्थियों को विद्यालय में जाने व प्रधानाध्यापक को ताला लगाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को कह दिया। इस पर ग्रामीण भड़क उठे और उन्होंने बीईईओ को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि वे धमकी से डरने वाले नहीं हैं। बेहतर होगा धमकी देने के बजाय बालकों की सामूहिक टीसी जारी कर दें।

 

अधिकारियों की अनदेखी से उनके बालकों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। बालक भले ही कक्षा आठ में पहुंच गए, लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते उनके स्वयं के नाम भी लिखना नहीं आता है। विद्यालय में कक्षा आठ के परिणाम में अधिकांश विद्यार्थियों को डी ग्रेड मिली है। (नि.प्र.)

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