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जलदाय विभाग की मिलीभगत से संवेदक की पौ-बारह

सरकारी नलकूप से हो रहा है पानी परिवहन  
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जलदाय विभाग की मिलीभगत से संवेदक की पौ-बारह

बांदीकुई. जलदाय विभाग का ही नलकूप, उसमें पानी भी पर्याप्त, बिल भी विभाग की जमा करा रहा है, लेकिन मलाई मार रहे हैं संवेदक। यह मामला है अलवर - सिकंदरा मेगा हाइवे पर खेजड़ा के बास के समीप स्थित नलकूप का, लेकिन जलदाय विभागीय अधिकारी इस मामले से जानकार होते हुए भी आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं। इसमें विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत होने से इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि शहर के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए त्रस्त हैं।


जानकारी के अनुसार एक ओर जलदाय विभाग शहर व आस-पास क्षेत्र में स्थित कुएं एवं नलकूपों को किराए पर लेकर लोगों को पानी मुहैया कराए जाने की वाहवाही लूट रहा है। जबकि दूसरी ओर हाइवे पर स्थित स्वयं के नलकूप का कोई उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस नलकूप से पानी भर कर संवेदक ले जा रहे हैं। जिसका विभाग की ओर से भुगतान किया जाएगा। इससे जलदाय विभाग को दोहरा चूना लग रहा है।

इससे जलदाय विभाग की पानी सप्लाई व्यवस्था भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि इस नलकूप में पानी भी पर्याप्त है। इससे 24 घण्टे में 50 से अधिक टैंकर पानी का भराव किया जा रहा है। एक टैंकर का जल परिवहन का भुगतान करीब 244 रुपए तय है। इससे संवेदकों की पौबारह हो रही हैं। खास बात यह है कि जलदाय विभाग यदि इस नलकूप से पाइप लाइन बिछाकर शहर में पानी सप्लाई करें तो कुछ वार्डों में पानी की समस्या से राहत मिल सकती है, लेकिन जिन नलकूपों में पानी है।

विभाग का उन नलकूपों से पानी सप्लाई किए जाने की ओर कोई ध्यान नहीं है। जबकि नए नलकूपों का निर्माण करा कर पाइप लाइन बिछाए जाने में अधिक दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मजबूरन पानी की समस्या अधिक होने के कारण लोगों को पानी के इंतजार में रातजगा करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय कि गत दिनों पानी सप्लाई व्यवस्था का अवलोकन करने आए शासन सचिव रजत मिश्रा भी स्थानीय अधिकारियों को जल स्त्रौत किराए पर लेकर पानी सप्लाई सुचारू करने की हिदायत देकर गए थे, लेकिन शासन सचिव के आदेश भी बेसर दिखाई दे रहे हैं। जबकि लोगों को महिने में 4 दिन भी पानी नहीं मिल रहा है।


आवश्यकता 65 लाख की मिल रहा है 18 लाख लीटर

जलदाय विभाग सूत्रों के मुताबिक शहर की आबादी के हिसाब से प्रतिदिन 65 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। क्योंकि वर्तमान आबादी करीब 65 लाख है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन औसतन सौ लीटर पानी मुहैया कराए जाने का नियम है, लेकिन उत्पादन मात्र 18 लाख लीटर हो रहा है।


इसमें 30 नलकूपों से 13 लाख लीटर एवं 5 लाख लीटर टैंकरों से पानी मिल रहा है। इस पानी सप्लाई की भी प्रभावी मॉनीटरिंग नहीं होने से लोगों को 8 से 10 दिन में एक बार पानी मिल रहा है। जो भी मात्र आधा घण्टे। ऐसे में क्षेत्र में पानी को लेकर त्राही-त्राही मची हुई है।

अधिकारियों से ली है अनुमति


&हाइवे पर स्थित नलकूप से श्यालावास तक पाइप लाइन नहीं है। ऐसे में नलकूप में पानी पर्याप्त होने के बाद भी उपयोग नहीं हो रहा था। ऐसे में अधीक्षण अभियंता एवं अधिशासी अभियंता से बात कर इस नलकूप से टैंकरों से पानी परिवहन किया जा रहा है। इसमें पानी भरने की राशि काट कर संवेदक को भुगतान दिया जाएगा।
राजेश शर्मा, सहायक अभियंता बांदीकुई