
चमोली टनल हादसा (AI Photo)
Chamoli Tunnel Accident News: उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार शाम निर्माणाधीन टनल में अचानक पानी और भूस्खलन से बड़ा हादसा हो गया। अलकनंदा नदी पर बन रही विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में भूस्खलन की चपेट में आने से 9 श्रमिकों की मौत हो गई। हादसे के समय 28 से अधिक मजदूर अंदर काम कर रहे थे। अब तक 22 श्रमिकों को बाहर निकाला जा चुका है, जबकि 6 की तलाश जारी है। हादसे में 13 मजदूर घायल हुए हैं। इनमें 10 का इलाज जिला अस्पताल गोपेश्वर, एक का श्रीनगर और एक का पीपलकोटी में चल रहा है।
हादसा गुरुवार शाम को करीब 7 बजे हुआ। बताया गया कि 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग में करीब 1.8 किलोमीटर अंदर मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान अंदर जोरदार धमाका हुआ और पानी के साथ भारी मलबा सुरंग में भरने लगा। अचानक हुई इस घटना से वहां अफरातफरी मच गई। सुरंग के अंदर से चीख-पुकार की आवाजें आने लगीं।
यह 444 मेगावाट की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना है, जिसका करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हादसे के समय सुरंग के अंदर ग्रेविटी पर पैकिंग का काम चल रहा था।
हादसे के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन, आईटीबीपी और सेना की टीमें मौके पर पहुंचीं। निर्माण कंपनी एचसीसी के अधिकारियों से सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीमों ने काम शुरू कर दिया था। टीएचडीसी के कार्यकारी निदेशक कुमार शरद ने बताया कि हादसे के समय टनल के अंदर 20 से 22 मजदूर फंसे हुए थे। उन्होंने बताया कि कई मजदूरों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। ज्यादातर मजदूर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के बताए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर भेज दी गई हैं। जिला प्रशासन समेत संबंधित एजेंसियों को त्वरित राहत एवं बचाव कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरंग में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना हमारी प्राथमिकता है। मैं स्वयं स्थिति पर नजर रखे हुए हूं और आवश्यकतानुसार हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रेस्क्यू किए गए श्रमिकों के इलाज में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रखी जा रही है।
एनडीआरएफ टीम के कमांडर अमृत लाल मीणा ने बताया कि सुरंग में भारी मात्रा में पानी भरा था। सुरंग के किनारों से भी पानी रिस रहा था। इसके कारण बचाव अभियान मुश्किल हो गया। विशेष उपकरणों की मदद से पानी के बीच फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया गया। रात में सुरंग के अंदर ऑक्सीजन की कमी और दलदल व पानी की स्थिति को देखते हुए राहत-बचाव अभियान रोकना पड़ा।
हादसे के बाद टीएचडीसी मुख्यालय में भी हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार को टीएचडीसी के सीएमडी सिपन कुमार गर्ग के साथ एक तकनीकी टीम दिल्ली से घटनास्थल पहुंचेगी। कुछ टीएचडीसी कर्मचारियों के भी सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई है।
प्रोजेक्ट निदेशक शरद कुमार ने बताया कि पहली प्राथमिकता सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए सभी संसाधनों को पूरी तरह लगाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी और घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि पानी अधिक आने के कारण मलबा आया।
Updated on:
14 Aug 2026 09:39 am
Published on:
14 Aug 2026 09:39 am
