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सांप के काटने पर नदी में बहाया बच्चा 15 साल बाद जिंदा मिला, सांप डसने पर पानी में क्यों बहाते हैं शरीर?

देवरिया में 15 साल पहले एक बच्चे को सांप के काटने के बाद घरवालों ने नदी में बहा दिया था।

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Sarpdansh

परिजनों के साथ 15 साल बाद लौटे अंगेश

देवरिया के मुरासों में एक युवक लौटकर आया है, जिसे 2008 में उसके परिवार ने नदी में बहा दिया था। अंगेश नाम के इस युवक के बारे में परिवार का कहना है कि जब वह 10 साल था तो उसको सांप ने काट लिया था। जिससे उसकी सांसे रुक गई। इसके बाद परिजनों ने उसे केले के तने से बांध सरयू नदी में बहा दिया।

अंगेश अब परिवार से पास लौटा है। उसका कहना है कि उसने होश आने पर उसने खुद को सपेरों की बस्ती में पाया था। उसे अपने घर की याद आती थी लेकिन सपेरे कहीं आने-जाने नहीं देते थे। हाल ही में उसने एक ट्रक ड्राइवर को अपनी कहानी बताई तो उसने चुपचाप उसे देवरिया पहुंचा दिया।

दावा- सपेरों ने जिंदा किया
युवक के परिजनों का कहना है कि अंगेश को डॉक्टर मृत घोषित कर चुके थे। उसे सपेरों ने फिर से जिंदा किया। क्यों देश के कई हिस्सों में सांप काटने पर बॉडी को नदी में बहाते हैं? क्या सांप काटने से मरे किसी शख्स को फिर से जिंदा किया जा सकता है? क्या है इन सवालों का जवाब?


सांप काटने के बाद पानी में बहाने की ज्यादातर तो धार्मिक वजहें हैं, वहीं एक मेडिकल से जुड़ा प्वाइंट है।

नदी में बहाने की धार्मिक मान्यता
ऐसी मान्यताएं हैं कि नदियों के किनारे रहने वाले लोग सांप के काटे लोगों को जिंदा कर सकते हैं। इसलिए ऐसे व्यक्तियों का दाह संस्कार ना करके जल प्रवाह कर दिया जाता था। इसी परंपरा को आज भी कुछ लोग मानते हैं।

एक और मान्यता ये है कि सांप के काटे से होने वाली मौत को अकाल मौत कहा जाता है। ऐसे इस तरह की मौत होने पर शव को अग्नि संस्कार नहीं करके किसी लकड़ी से बांधकर पानी मे फेंक दिया जाता है। ये सिर्फ मान्ताएं हैं, इसमें कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है।

डॉक्टर क्या कहते हैं?
कोई इंसान मरने के बाद जिंदा हो जाए, इसे डॉक्टर अदिति त्यागी सिरे से नकारती हैं। उनका कहना है कि इस बात का कोई आधार नहीं है। वो कहती हैं कि सांप के जहर से खून गाढ़ा हो जाता है और उसका फ्लो रुक जाता है।

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त्यागी कहती हैं कि इसी वजह से सांप काटने के मरीज को एक्टिव रखने की कोशिश की जाती है। ताकि खून का फ्लो बना रहे। वो कहती हैं कि पानी के संपर्क में रहने से खून का फ्लो बना रहने में कुछ फायदा हो सकता है। इसके अलावा वो कहती हैं कि कई बार गहरी बेहोशी को परिजन मौत समझ लेते हैं। उसे बहाए जाने के कुछ घंटे बाद अगर वो किसी को मिल जाता है तो उसे बचाया जा सकता है।