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छत्तीसगढ़ के ITBP जवान का निधन, राजकीय सम्मान के साथ आज होगा अंतिम संस्कार, शोक की लहर

ITBP Jawan Khilesh Dhruv Passes Away: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम शंकरदाह निवासी और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान खिलेश कुमार ध्रुव (32) का ड्यूटी पूरी कर लौटते समय निधन हो गया।
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ITBP Jawan Death

आईटीबीपी जवान खिलेश ध्रुव का निधन (फोटो सोर्स- पत्रिका)

ITBP Jawan Death: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान एवं धमतरी जिले के ग्राम शंकरदाह निवासी खिलेश कुमार ध्रुव (32) का रविवार को गुवाहाटी (असम) में निधन हो गया। वे छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर क्षेत्र में ड्यूटी पूरी कर अपनी मूल पदस्थापना लौट रहे थे। रास्ते में अचानक तबीयत बिगडऩे पर उनका उपचार किया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

खिलेश कुमार ध्रुव पंचायत विभाग में कार्यरत पंचायत सचिव खूबचंद ध्रुव के छोटे भाई थे। कम उम्र में ही देश सेवा के लिए समर्पित जवान के असामयिक निधन से परिवार, रिश्तेदारों, साथियों और क्षेत्रवासियों में गहरा शोक व्याप्त है।

राजकीय सम्मान के साथ आज होगा अंतिम संस्कार

परिजनों ने बताया कि जवान का पार्थिव शरीर गृह ग्राम शंकरदाह लाया जा रहा है, जहां मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। आईटीबीपी जवान के निधन पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा बलों के जवानों के शामिल होने की संभावना है।

ITBP Jawan Death: नारायणपुर ड्यूटी के बाद लौट रहे जवान की मौत

परिजनों ने बताया कि खिलेश नारायणपुर में तैनाती पूरी करने के बाद गुवाहाटी लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई और उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। स्व. खिलेश ध्रुव अपने कर्तव्यनिष्ठ, सरल और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उनके बड़े भाई खूबचंद ध्रुव पंचायत विभाग में पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत हैं। परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में उनके निधन से गहरा शोक व्याप्त है।

वर्ष 2013- 14 से पदस्थ थे

मृतक जवान खिलेश कुमार ध्रुव वर्ष 2013- 14 से पदस्थ थे। वे अपने कर्तव्यनिष्ठ, सरल एवं मिलनसार स्वभाव के कारण परिवार, समाज और अपने साथियों के बीच विशेष पहचान रखते थे। उन्होंने देश की सीमाओं की सुरक्षा एवं राष्ट्र सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म माना और पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। उनके निधन से न केवल परिवार को अपूरणीय क्षति हुई है, बल्कि पूरे क्षेत्र ने एक होनहार, साहसी और राष्ट्रभक्त जवान को खो दिया है।