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Dhamtari News: इथेनॉल पेट्रोल बना वाहन चालकों की परेशानी, मैकेनिक बोले- इंजन सीज होने का भी खतरा

Dhamtari News: वाहन चालकों को इंजन झटके, स्टार्टिंग और फ्यूल टैंक में सफेद लिक्विड जैसी समस्याओं की शिकायत मिल रही है।
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धमतरी

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Love Sonkar

Jul 20, 2026

Dhamtari News

रत्नाबांधा रोड स्थित ऑटो पाट्स में हर दिन गाड़ी बंद होने के केस आ रहे (Photo Patrika)

Dhamtari Auto News: सडक़ों पर सरपट दौडऩे वाले वाहनों की रफ्तार इन दिनों ई-पेट्रोल (इथेनॉल मिश्रित ईंधन) ने ब्रेक लगा दिया है। अचानक दुपहिया और चार पहिया वाहनों के बंद होने से वाहन मालिक परेशान हैं। सबसे ज्यादा इंजन में झटके लेने, फ्यूल टैंक व कार्बोरेटर में पानी जमा होने की शिकायतें सबसे ज्यादा आ रही है। ऑटो पाट्र्स मैकेनिक रामकुमार साहू, भीषम साहू, गैरेज संचालक शिवा प्रधान ने बताया कि जब से ई-पेट्रोल आया है, तब से लोग अचानक बंद वाहन लेकर गैरेज, ऑटो पार्ट्स पहुंच रहे हैं। इस तरह के प्रतिदिन10 से 15 केस आ रहे हैं। ज्यादातर शिकायत वाहन के बार-बार बंद होने की मिल रही है।

पेट्रोल की जगह पानी या एक गाढ़ा सफेद लिक्विड

वाहन की टंकी खोलने पर फ्यूल टैंक में पेट्रोल की जगह पानी या एक गाढ़ा सफेद लिक्विड मिल रहा है। इस समस्या की मुख्य वजह पेट्रोल में मिलाया जा रहा ई-पेट्रोल (इथेनॉल मिश्रित ईंधन) है, जो वाहन चालकों के लिए अब सिरदर्द बनता जा रहा है। अचानक आ रही इस तकनीकी खराबी से न केवल आम जनता परेशान है, बल्कि लोगों की जेब पर भी भारी असर पड़ रहा है। मैकेनिकों का कहना है कि सुबह गाड़ी स्टार्ट न होना, चलते-चलते अचानक बंद हो जाना या पिक-अप छोड़ देना जैसी समस्याएं अब आम हो चुकी हैं। जब इन वाहनों की टंकियां खोली जाती हैं, तो उनमें नीचे पानी की मोटी परत जमी मिलती है।

वाहनों में खराबी आने का मुख्य कारण

वाहन मैकेनिक मितेश साहू, बालाराम साहू, घनश्याम देवंागन ने बताया कि इथेनॉल की सबसे बड़ी रासायनिक विशेषता यह है कि यह हाइग्रोस्कोपिक होता है, जो कि हवा में मौजूद नमीं को बहुत तेजी से अपनी ओर सोखता है। जब गाड़ी की टंकी में ई-पेट्रोल होता है और वाहन धूप, छांव या बरसात के मौसम में खड़ा रहता है, तो टंकी के अंदर की हवा से इथेनॉल नमीं सोख लेता है। एक निश्चित सीमा से अधिक नमीं सोखने पर पेट्रोल और इथेनॉल का मिश्रण आपस में अलग हो जाता है। इथेनॉल पानी को साथ लेकर टंकी के सबसे निचले हिस्से में बैठ जाता है और शुद्ध पेट्रोल ऊपर तैरने लगता है। वाहनों का फ्यूल पाइप टंकी के निचले हिस्से से जुड़ा होता है, इसलिए स्टार्ट करते समय इंजन में पेट्रोल की जगह पानी और इथेनॉल का यह गाढ़ा मिश्रण चला जाता है। इसके कारण गाड़ी तुरंत बंद हो जाती है, झटके मारती है और प्लग शॉर्ट हो जाता है।

क्या है ई-पेट्रोल और क्यों आ रही है वाहनों में खराबी

ई-पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें सामान्य पेट्रोल के साथ एक निश्चित मात्रा (जैसे 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक) में इथेनॉल मिलाया जाता है। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का या खराब अनाज से तैयार होने वाला एक प्रकार का अल्कोहल है।

ई-पट्रोल के लाभ

प्रदूषण में कमी

इथेनॉल में ऑक्सीजन होने के कारण ईंधन का दहन बेहतर होता है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन कम होता है। यह पर्यावरण के अनुकूल है।

विदेशी मुद्रा की बचत

भारत को कच्चा तेल आयात करने के लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। देश में इथेनॉल बनने से तेल आयात पर निर्भरता कम हो रही है।

किसानों को फायदा

इथेनॉल गन्ने और अनाज से बनता है, जिससे किसानों को उनकी फसल का अतिरिक्त और सही दाम मिल पाता है।

ई-पट्रोल के नुकसान

वाहनों के पाट्र्स को नुकसान

पुराना इंजन या सामान्य रबर-प्लास्टिक के फ्यूल पाइप इथेनॉल के प्रति संवेदनशील होते हैं। यह मिश्रण पुराने वाहनों के होस पाइप, ओ-रिंग्स और कार्बोरेटर के नोजल को जल्दी गला देता है।

माइलेज में कमी

सामान्य पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल की कैलोरीफिक वैल्यू कम होती है, इसलिए ई-पेट्रोल से वाहनों के माइलेज में 5 से 8 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा रही है।

ई-पेट्रोल और सामान्य पेट्रोल में अंतर

सामान्य पेट्रोल

यह कू्रड ऑयल (कच्चे तेल) से रिफाइन करके बनाया जाता है। इसमें पानी या नमी सोखने की क्षमता नहीं होती। यदि टंकी में थोड़ा पानी चला भी जाए, तो वह पेट्रोल में घुलता नहीं है, बल्कि अलग रहता है। यह लंबे समय तक स्टोर रहने पर भी खराब नहीं होता।

ई-पेट्रोल

यह पेट्रोल और बायो-फ्यूल (अल्कोहल) का मिश्रण है। रासायनिक रूप से अल्कोहल (इथेनॉल) में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक तेजी से जलता है, लेकिन इसकी एनर्जी डेंसिटी कम होती है।

सबसे बड़ा अंतर

सामान्य पेट्रोल नमीं से प्रभावित नहीं होता, जबकि ई-पेट्रोल हवा के संपर्क में आते ही नमीं को पानी में बदल देता है। यदि ई-पेट्रोल को 1-2 महीने तक गाड़ी में छोड़ दिया जाए, तो वह पूरी तरह अपनी क्षमता खो देता है और टंकी के अंदर जंग पैदा करने लगता है।

वाहन बंद होने पर ये करें

टंकी को खाली न छोड़ें

फ्यूल टैंक जितना खाली रहेगा, उसमें हवा (नमी) उतनी ही ज्यादा बनेगी, इसलिए कोशिश करें कि टंकी हमेशा आधी से ज्यादा भरी रहे।

धूप और बारिश में सीधी पार्किंग से बचें

गाड़ी को छांव में खड़ी करें। तापमान में उतार-चढ़ाव से टंकी के अंदर कंडेनसेशन (भाप से पानी बनना) की प्रक्रिया तेज होती है।

लंबे समय तक खड़ी गाड़ी का पेट्रोल निकालें

यदि बाइक या कार को 15-20 दिनों से अधिक समय के लिए खड़ा रखना है, तो उसकी टंकी और कार्बोरेटर से पेट्रोल निकाल लें, नहीं तो पूरा फ्यूल खराब हो जाएगा।

विश्वसनीय पेट्रोल पंप से ही ईंधन लें

ऐसे पंपों का चुनाव करें जहां ईंधन की खपत बहुत ज्यादा हो, क्योंकि वहां भूमिगत टैंकों में ताजा स्टॉक आता है और नमीं जमने का खतरा कम होता है।

फ्यूल एडिटिव्स का उपयोग

बाजार में अब एंटी-इथेनॉल या वॉटर रिमूवर फ्यूल एडिटिव्स मिलने लगे हैं। लंबी दूरी या पुरानी गाडिय़ों में मैकेनिक की सलाह पर इनका उपयोग कर सकते हैं।