
मांडू
MP Tourism: विंध्याचल की पहाड़ियों पर करीब 2000 फीट की ऊंचाई पर बसा है मध्य प्रदेश का मांडू। अपनी नेचुरल खूबसूरती और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। मध्य प्रदेश के खूबसूरत ऐतिहासिक टूरिस्ट प्लेसेज में से एक है मांडू, जिसे देखने के लिए देश और दुनिया से लोग आते हैं। मानसून सीजन में टूरिस्ट की यहां भीड़ उमड़ती है। इन बरसाती दिनों में मांडू की वादियां टूरिस्ट का खास अट्रेक्शन होती हैं।
मध्य प्रदेश के धार जिले का मांडू (mandu) इन दिनों टूरिस्ट से गुलजार है। अगर आप भी मध्य प्रदेश के शादियाबाद यानी खुशियों की नगरी मांडू में घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इस खबर को जरूर पढ़ें यहां हम आपको बता रहे हैं, मांडू की 5 बेस्ट स्पॉट्स के बारे में जहां आपको एक बार जरूर घूमना चाहिए।
15वीं शताब्दी के अंत में सुल्तान गयासुद्दीन के शासनकाल का एक दर्शक हॉल आज भी राजसी वैभव की कहानी कहता है। 77 डिग्री के कोण पर मुड़ीं दीवारें इसे अलौकिक बनाती हैं। वास्तुकला के अद्भुत नमूने इस महल में प्रवेश करने के लिए रानियां और दासियां हाथी की पीठ पर बैठकर जाती थीं।
मांडू के जहाज महल (jahaj mahal) की खूबसूरती देखते ही बनती है। इसकी आकृति हूबहू एक जहाज जैसी है। कपूर और मुंज सागर तालाब के बीच खड़ा ये ऐतिहासिक महल बरसात के सीजन में सुंदरता को हर दिन निखारता नजर आता है। गयासुद्दीन खिलजी ने अपनी 15000 रानियों के लिए इसे बनवाया था।
मांडू की खूबसूरती के बीच दो प्यार करने वालों की अनोखी प्रेम कहानी (love story) भी सुनाता है। ये कहानी सुनकर टूरिस्ट इन महलों को देखने का मौका बिल्कुल भी गंवाना नहीं चाहते। मांडू में ऐसे कई ऐतिहासिक महल और इमारतें हैं, लेकिन रानी रूपमती (rani roopmati mahal) और बाज बहादुर के महल में आते ही टूरिस्ट इतिहास के उन पन्नों में खो जाते हैं। वहीं यहां आकर कपल्स के दिल भी धड़कने लगते हैं।
मांडू में रीवा कुंड बाज बहादुर और रूपमती की अनोखी प्रेम कहानी को समर्पित है। कहा जाता है कि रीवा कुंड एक कृत्रिम झील है, जिसका निर्माण बाज बहादुर ने रूपमती के मंडप में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए करवाया था। किंवदंती है कि रूपमती नर्मदा नदी की पूजा करती थीं और अपने मंडप के ऊपर से इसे देखा करती थीं। बाज बहादुर ने रीवा कुंड का निर्माण किया और रूपमती के लिए नर्मदा नदी का पानी यहां लाया गया। इस तरह रूपमती अक्सर इस कुंड में पूजा करने आती थीं।
मांडू में महलों के बीच एक ऐतिहासिक शिव मंदिर भी है। नीलकंठ शिवमंदिर इस्लामिक शैली में बने इस शिवमंदिर में प्राकृतिक धारा का पानी 'शिव लिंग' के पीछे से बहता है। प्रांगण के मध्य में एक पवित्र तालाब है, जिसमें एक जलधारा बहती है। तीर्थयात्री आज भी यहां पूजा करने आते हैं। माना जाता है कि अगर जलभराव के बीच में यदि कोई एक पत्ता रख दे और वह पत्ता भूलभुलैया से बाहर निकल जाए, तो उस व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है।
Updated on:
07 Jul 2024 07:24 pm
Published on:
01 Jul 2024 02:29 pm
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