
एकादशी पर विष्णु पूजा- AI photo source grok
Ekadashi Puja : सावन महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी या पवित्रा एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। माना जाता है कि पुत्रदा एकादशी पर व्रत और पूजा करने से संतान सुख प्राप्त होता है। पुत्रदा एकादशी पर नहाने के पानी में गंगाजल या नर्मदा जल मिलाकर स्नान करने की भी परंपरा है। पुत्रदा एकादशी का व्रत खास माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिविधान से पूजा करनी चाहिए। उन्हें तुलसी जरूर चढ़ाएं पर ये पवित्र पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। एकादशी के दिन तुलसी
के पत्ते तोड़ना शुभ नहीं माना जाता।
व्रत का संकल्प लें और फिर विधिविधान से भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की पूजा करें
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि पुत्रदा या पवित्रा एकादशी इस बार 23 अगस्त को है। इस दिन सुबह स्नान के बाद गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके व्रत का संकल्प लें और फिर विधिविधान से भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की पूजा करें।
विष्णुजी का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। पुरूष सूक्त या विष्णु सहस्रनाम स्त्रोत्र का पाठ करें। एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम स्त्रोत्र का पाठ का बहुत महत्व बताया गया है। इससे जीवन की बाधाएं खत्म होती हैं और दुख दूर होकर धीरे धीरे सुख प्राप्त होेने लगता है।
पुत्रदा एकादशी या पवित्रा एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी जरूर चढ़ाना चाहिए पर इस दिन तुलसी नहीं तोड़ें। एकादशी के दिन तुलसी तोड़ना वर्जित माना गया है इसलिए विष्णुजी की पूजा के लिए एक दिन पहले यानि दशमी तिथि को ही तुलसी तोड़कर रख लें। पुत्रदा एकादशी पर शाम को तुलसी के पौधे के समक्ष देशी घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करना चाहिए।
सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानि श्रावण पुत्रदा एकादशी पर संतान प्राप्ति और उनकी खुशहाली के लिए व्रत रखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन निसंतान दंपत्ति व्रत रखकर श्रीहरि की विधिपूर्वक पूजा करें तो उन्हें जल्द ही संतान प्राप्ति होती है।
अधिकांश पंचांगों के अनुसार सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त को तड़के 02:00 बजे से प्रारंभ हो रही है। एकादश 24 अगस्त को सुबह 04:18 बजे तक रहेगी। ऐसे में मंगलवार यानि 23 अगस्त को ही पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
Updated on:
22 Aug 2026 02:01 pm
Published on:
22 Aug 2026 02:01 pm
