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भिलाई

Watch the video.. महिलाओं ने उपवास रहकर किया वट वृक्ष की पूजा

देवी सावित्री ने जिस तरह से अपने पति के प्राण को यमराज से उपवास रहते हुए, तर्क के साथ वापस लेने में सफल रही और पति के अल्प आयु को दीर्घायु में बदल दिया था।

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भिलाई

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Abdul Salam

Jun 06, 2024

शहर में गुरुवार को महिलाओं ने उपवास रखकर वटवृक्ष की पूजा अर्चना की। इस मौके पर वृक्ष में पति के दीर्घायु के लिए वटवृक्ष में रक्षासूत्र भी बांधा। कथा में बताया जाता है कि देवी सावित्री वटवृक्ष में निवास करती है। मान्यताओं के अनुसार वटवृक्ष के नीचे ही देवी सावित्री ने अपने पति को पुन: जीवित किया था। तब से यह व्रत वट सावित्री के नाम से जाना जाता है।

अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए पूजा

भिलाई, टाउनशिप सेंट्रल एवेन्यू पार्क और भिलाई-तीन में कई जगह वटवृक्ष की पूजा अर्चना करते महिलाओं को देखा गया। इस दौरान महिलाएं दुल्हन की तरह सजधज कर पति के दीर्घायु के लिए पूजा करने पूजा की थाली लेकर घर से निकलीं। एक पेड़ में कई महिलाओं का बंधा हुआ रक्षासूत्र देखा जा सकता है।

क्या है देवी सावित्री की कथा

पति सत्यवान का सिर सावित्री ने गोद में रख लिया। इतने में यमराज सत्यवान के प्राण हरने लगे। यह देखकर सावित्री ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस पर यमराज सत्यवान के प्राण ले जाने लगे। यमराज ने बताया कि सत्यवान अल्पायु थे, इसलिए उनका समय आ गया है। यमराज ने सावित्री को घर लौटने को कहा। सावित्री यमराज के पीछे आती रही। यह देखकर यमराज ने वापस लौटने के बदले सावित्री को तीन वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने पहला वर है कि मेरे सास-ससुर की आंखों की रोशनी वापस आ जाए, दूसरा वर सावित्री का खोया हुआ राज्य वापस मिल जाए। तीसरा वर मांगते हुए सावित्री ने कहा कि 100 पुत्रों की मां बनना चाहती हूं। यमराज ने अपना पीछा छुड़ाने के लिए सावित्री को तथास्तु कहा और वहां से सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे। तब सावित्री ने यमराज को रोकते हुए कहा कि वरदान पूरा कैसे होगा, जब पति के प्राण ही हर लिए हैं। पतिव्रता स्त्री को देखकर यमराज ने सावित्री के पति सत्यवान के प्राण को वापस लौटा दिए। यमराज के कहने पर सावित्री घर के पास मौजूद वट वृक्ष के पास लौटी, तो वहां पर सत्यवान के मृत शरीर में प्राण आ गए थे। तब से ही वट वृक्ष की पूजा हर साल की जाती है।