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कम खतरा और ज्यादा लाभ का धंधा है काली फिरौती

रसूखदार बने हुए है ठेकेदारपुलिस भी समझौता कराने में रखती है विश्वास
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कम खतरा और ज्यादा लाभ का धंधा है काली फिरौती

कम खतरा और ज्यादा लाभ का धंधा है काली फिरौती
-रसूखदार बने हुए है ठेकेदार
-पुलिस भी समझौता कराने में रखती है विश्वास
धौलपुर. जिलेभर में मवेशी चोर गिरोह की सक्रियता जारी है, इन गिरोह की ओर से ना केवल मवेशी चुराएं जा रहे है, बल्कि चोरी के मवेशियों को लौटाने के एवज में मोटी फिरौती भी पशुपालकों से ऐंठी जा रही है। मवेशी के समीपवर्ती प्रदेशों में बेचे जाने के डर से पशुपालकों को फिरौती की मनमानी रकम चुकाना मजबूरी बना हुआ है। ऐसे में पुलिस से शिकायतें भी मवेशी चोरों पर कोई असर नहीं डाल पा रही है। ऐसे में आसानी से मवेशी फिरौती मिल जाने के कारण यह धंधा जिलेभर में जमकर फल फूल रहा है।
वर्षो से चल रहा धंधा
मवेशी चोरी का धंधा जिलेभर में वर्षो पुराना है। इस प्रकार का गिरोह चलाने वाले अधिकांश लोग डांग क्षेत्र के गांवों के कुछ लोग है। इन गिरोह को कई रसूखदारों का संरक्षण भी प्राप्त है और इसके अलावा जिलेभर में कई इसके ठेकेदार है। पीडि़त पशुपालक से ये ठेकेदार किसी ना किसी माध्यम से संपर्क कर लेते है और मवेशी चोर गिरोह तक पहुंचा कर या अपने यहां पर बैठक कराकर फिरौती का सौदा तय करा देते है। इस प्रकार के मामलों की भनक पुलिस तक को नहीं लग पाती है और पशुपालक को फिरौती देकर आसानी अपना मवेशी मिल जाता है।
चलता है पनिहाई का खेल
सरमथुरा क्षेत्र में पारंपरिक रूप से इन मामलों में पनिहाई का खेल चलता है। जिसमें किसी भी पशुपालक की अगर भैंस चोरी हो जाती है तो वह अपने दमखम पर सुराग देने वाले को एक इनाम राशि की घोषणा कर दी जाती है । जिसमें कोई भी व्यक्ति जिसका नाम का खुलासा ना करने की शर्त पर उस की भैंसों की सूचना देता है और सूचना को पक्की कराने के लिए जहां भी भैंस रखी जाती हैं उनको उस व्यक्ति को दिखा लाता है और इस पनिहाई की राशि का हकदार बन जाता है और फिर भैंस मालिक और चोरों के बीच झगड़ा शुरू हो जाता है अगर झगड़े की निपटारे का मामला चलता है तो भैसों की कीमत एवं अपने पनिहाई की राशि भी चोरी करने वाले व्यक्ति से वसूली जाती है। यह गोरखधंधा क्षेत्र में सैकड़ों बरसो से पारंपरिक रूप से प्रचलित है।
चोरों ने बदले चोरी के तरीके
सरमथुरा क्षेत्र में कई साल पहले पशुओं की चोरी के अजब तरीके होते आए हैं । जिनमें बड़ी ही होशियारी से चोर मवेशियों को उनके बाड़े से खोलकर कर निकाल ले जाते हैं और धीरे धीरे मवेशियों को डांग इलाके में ले जाते हैं इन मवेशियों को कोई देख ना ले उसका भी अजब तरीका होता था। इन मवेशियों को डांग इलाके में जंगल के बीच पैर बांधकर पटक दिया जाता था और फिर रात्रि में पैरों को खोल कर पुन: अन्य इलाकों में ले जाया जाता था लेकिन समय के साथ साथ चोरी का तरीका भी बदल गया है, अधिकतर मामलों में अब यह चोर मवेशी को बाड़े से निकाल कर तुरंत ही वाहनों में लादकर दूसरे इलाकों में पहुंचा दिया जाता है। जिस में पशु मालिक को ढूंढने में भारी परेशानी पैदा होती है।

केस-1
खाना खिला कर ली फिरौती
शहर में रहने वाले एक पशुपालक ने बताया कि वह स्थानीय एक आवासीय कॉलोनी में रहता है, उनके घर से कुछ दिनों पहले एक भैंस चोरी हो गई, जानकारी जुटाएं जाने पर भैंस का डांग क्षेत्र में ले जाना सामने आया। इस पर डांग क्षेत्र के गांव में रहने वाले एक व्यक्ति से मुलाकात की, जिसने भैंस दिलाए जाने का आश्वासन दिया और डांग क्षेत्र के एक गांव में ले गया। यहां नाम बताए जाने के बाद मौजूद दो जनों की ओर से काफी सम्मान दिया गया और भोजन भी कराया। इसके बाद जब भैंस की चर्चा शुरू की तो इन्होंने भैंस दिए जाने के एवज में 35 हजार रूपए की रकम मांगी। काफी देर तक समझाइश के बाद 30 हजार रूपए पर जाकर समझौता थम गया। इस दौरान 30 हजार रूपए की राशि देखकर भैंस को गांव से ले आया गया। पीडि़त पशुपालक ने बताया कि भैंस चोरों का गिरोह जिलेभर में सक्रिय है और इनके ठेकेदार भी है, जो कि भैंस चोरी होने वाले पीडि़त से मुलाकात करते है और रूपरेखा रच कर फिरौती भैंस चोरों को दिला देते है। पीडि़त ने बताया कि डर के कारण कोई भी पुलिस थाने पर मामला दर्ज नहीं कराता है, क्योंकि इस प्रकार के गिरोह पहले भी पुलिस की निगाह में है, लेकिन उनके खिलाफ कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।
केस-2
नाम नहीं बताने की शर्त पर मिली भैंस
सैपऊ क्षेत्र में रहने वाले एक पशुपालक की भैंस चोरी हो गई। इस दौरान पशुपालक ने संपर्क में भैंस चोर गिरोह का एक दलाल आया और भैंस को सुरक्षित दिलाए जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद दलाल के माध्यम से भैंस चोरी करने वालों से संपर्क किया गया और फिरौती की रकम तय की गई, इस दौरान यह भी शर्त रखी गई कि गिरोह के किसी भी सदस्य नाम किसी भी नहीं बताया जाएंगा। तय राशि को दिए जाने के बाद डांग क्षेत्र में बताएं गए स्थान पर पहुंचने पर भैंस को सुरक्षित पाया गया। पशुपालक ने बताया कि क्षेत्र में मवेशी चोर गिरोह सक्रिय है, लेकिन पीडि़तों को फिरौती दिए जाने के बाद सुरक्षित मवेशी मिल रहे है, जिसके चलते कोई भी शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटाता है।
विशेष पुलिस दल गठित करते हुए मुखिबरों के जरिए मवेशी चोर गिरोह के सदस्यों को चिन्हित किया जाएंगा और सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएंगी।
अजय सिंह, जिला पुलिस अधीक्षक, धौलपुर