
मचकुंड धाम पर क्षतिग्रस्त घाट। फोटो। पत्रिका
धौलपुर। जिले का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन स्थल और तीर्थों के भांजे कहे जाने वाले मचकुंड स्थल पर वैसे तो करोड़ों रुपए के कार्य हुए है। मचकुंड के पश्चिमी भाग की स्थिति पहले से बेहतर हुई है लेकिन अभी भी कुछ हिस्सों पर ध्यान नहीं दिया। गुरुद्वारे की तरफ कई पुराने जीर्णशीर्ण इमारतों की मरम्मत नहीं होने से यह इमारतें अब साथ छोड़ रही हैं। धीरे-धीरे यहां सामने की तरफ एक इमारत की दीवार ढह चुकी है और बड़ी दरारें आ रही हैं, जो इस ऐतिहासिक सरोवर को नुकसान पहुंचा सकती है।
ऐसा नहीं है कि यह दृश्य किसी को दिखाई नहीं देते लेकिन जिम्मेदार हर बार बजट न होने की बात कहकर आगे बढ़ जाते हैं। यानी ढह रही दीवार की मरम्मत तक को राशि नहीं है। जबकि मचकुंड सरोवर पूर्वी राजस्थान में ही नहीं आसपास के प्रदेशों में भी खासा प्रसिद्ध है। वैसे तो यह परिसर पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है।
लेकिन यहां पर सार-संभाल की जिम्मेदारी नगर परिषद पर ही है। लेकिन परिषद पहले ही तंगहाल है, ऐसे में वह केवल सफाई कार्य और आवश्यक रोशनी व्यवस्था तक ही सीमित है। अधिकारियों का कहना है कि मचकुंड जैसे तीर्थस्थल पर व्यवस्था करने के लिए बड़ी राशि चाहिए।
हाल में भरतपुर मुख्यालय स्थित सुजान गंगा नहर में पर्यटन के लिए लिहाज पर बड़े स्तर पर कार्य हुआ। यहां पर रंगीन म्यूजिकल फव्वारों का संचालन शुरू हुआ है जो आमजन को भा रहा है। जबकि धौलपुर में मचकुंड पर पूर्व में संचालित फाउंटेन काफी समय से बंद पड़े है।
वहीं, मचकुंड को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर से पूर्व में करोड़ों रुपए की राशि से लाइट एंड साउंड शो, विश्राम गृह और पार्किंग का निर्माण हुआ था। लेकिन वर्तमान में लाइट एंड साउंड शो पूरी तरह शांत पड़ा है और अब तो उपकरण क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इस पर प्रशासन और न ही पर्यटन विभाग ने ध्यान दिया। नतीजा ये हुआ कि पर्यटक मचकुंड से दूर होते जा रहे हैं।
मचकुंड के पश्चिमी घाट की दशा हाल के दिनों में हुए कार्यों के चलते बदली है और अब यहां पर आमजन के साथ शहर के लोग पहुंचते हैं। देवस्थान व पुरातत्व विभाग की ओर से मचकुंड धाम पर खस्ताहाल हो चुकी छतरियों और मंदिरों के जीर्णोद्धार पर करीब 3 करोड़ की राशि से कार्य कराए है। साथ ही कुछ समय पहले महिला श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए यहां पर करीब 20 लाख रुपए की लागत से घाटों पर शौचालय और चेजिंग रूम का भी निर्माण हुआ है।
मचकुंड सरोवर में हाल में नगर परिषद की ओर से बोटिंग शुरू की गई है। अभी एक ही बोट संचालित है और पर्यटक इसमें लुत्फ उठा रहे है। लेकिन बैटरी से संचालित बोट जल्दी हांफ जाती है। नगर परिषद प्रशासन को पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां पर सुविधाएं बढ़ानी होंगी। साथ ही रोशनी की उचित व्यवस्था होने पर देर शाम को यहां आने वाले लोग आसानी से लुत्फ ले सकेंगे। वहीं, मचकुंड स्थल कई बाइकर्स अंधा-धुंध तरीके से चलाते हैं और शोरगुल करते है, जिससे पर्यटक सहम जाते है। चौकी पुलिस भी केवल वीआईपी के आने पर ही बाहर निकलती है।
मचकुंड स्थल पर बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए कोई खास सुविधा नहीं है। यहां पर परिक्रमा में चारों तरफ पीने के लिए पानी तक नहीं है। केवल लाडली जगमोहन मंदिर की तरफ लगा वाटरकूलर लोगों की प्यास बुझा रहा है। जिससे अधिकतर लोग पानी की बोतल खुद लेकर आते हैं। साथ ही यहां पर पर्यटकों के लिए कोई ओपन कैफे या छोटा सा रेस्टारेंट तक नहीं है। जिससे पर्यटक यहां आनंद के साथ नजारे का लुत्फ उठा सकें।
वहीं, मचकुंड जाने वाले लोग स्वयं अपने साधनों से जाते हैं। यहां पर्यटकों या आमजन को कम खर्चे पर ले जाने के लिए कोई सार्वजनिक बस या फिर अन्य कोई साधन नहीं है। जिससे कई दफा बाहर से आने वाले लोग अनजाने में पैदल जाने वाले लोग परेशान होते हैं। जानकारी के अनुसार यहां यह समस्या वर्तमान में ही उत्पन्न नहीं हुई है बल्कि पूर्व से व्याप्त है। जिससे स्थानीय परेशान हैं। इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
Published on:
09 Jun 2026 03:19 pm
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