
बिना लाइसेंस के खोल रखी मेडिकल दुकानें, विभाग ने मूंदी आंखे
धौलपुर. जिले में कुछ समय से बिना लाइसेंस के दवा बेच रहे मेडिकल स्टोरों की भीड़ हो गई है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में कथित झोलाछाप अपने यहां बना रखे दवाखाना से मरीज को दवा थमा देते हैं। कई मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के चल रहे हैं। लेकिन औषधि नियंत्रक विभाग की ओर से इन मेडिकल स्टोरों की जांच नहीं करने से ये आराम चांदी कूट रहे हैं। साथ ही मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। ये लोग बिना चिकित्सक के पर्चा के मरीज को दवा थमा देते हैं। जिले में संचालित इन कथित मेडिकल स्टोरों को लेकर महकमा चुप्पी साधे बैठा हुआ है।
जिलेभर में औषधि विभाग के पास सिर्फ करीब 520 फार्मासिस्ट लाइसेंस धारक ही मेडिकल स्टोर से दवा की बिक्री कर रहे हैं। लेकिन बिना लाइसेंस के कई मेडिकल स्टोर संचालित हैं। जिसकी जानकारी विभाग के पास तक नहीं है। औषधि विभाग इनके स्टोर तक पहुंच ही नहीं पाता है। ये कथित मेडिकल स्टोर कस्बा और ग्रामीण क्षेत्रों में खुले हुए हैं। जिनमें राजाखेड़ा, बाड़ी, बसेड़ी सरमथुरा, सैंपऊ क्षेत्र में कई मेडिकल स्टोर बिना बिना लाइसेंस के चल रहे हंै। नियमों की अनदेखी के बावजूद औषधि नियंत्रक विभाग चुप्पी साध कर बैठा हुआ है।
किसी भी दवा दुकान पर दवाओं की बिक्री करने के लिए खुद फार्मासिस्ट का होना बेहद जरूरी है। लेकिन कई दुकानों पर बिना जानकारी ही दवा बिक्री का खेल चल रहा है। वहीं, कुछ दुकानदार किराये पर फार्मासिस्ट का लाइसेंस लेकर दुकान चलाते दिख जाएंगे। जिसके नाम से लाइसेंस है, वह कम ही दिखाई पड़ता है। केवल दीवार पर उसका प्रमाण पत्र जरुर दिख जाएगा।
जुगाड़ से चल रही अधिकांश दुकानें
जुगाड़ के फार्मासिस्ट से दवा बेचकर मुनाफा कमाने वालों अच्छी खासी है। लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। औषधि निरीक्षक कभी कभार मेडिकल स्टोर पर जांच पड़ताल करने पहुंच जाते हैं और खानापूर्ति कर लौट आते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में जांच नहीं होने से कथित दवा विक्रेता आसानी से दवा बेच चांदी कूट रहे हैं। साथ ही मरीजों के जीवन खतरे में डाल रहे हैं।
खरीदने के बाद दवा दिखा लेना
शहर व कस्बों में आम तौर पर चिकित्सक कुछ ही मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की सलाह देते हैं। कारण कि उनकी लिखी दवाएं हर जगह नहीं मिलती। दवा लिखते समय चिकित्सक इस बात का कतई ध्यान नहीं देते कि उस दुकान पर फार्मासिस्ट है या नहीं। हां, दवा सही मिली है या नहीं, इसके लिए वह मरीज को सलाह जरूर देते हैं कि दवा खरीदने के बाद दिखा लेना।
आंकड़े पर एक नजर
- जिले में 520 मेडिकल स्टोर पंजीकृत
- 205 हैं थोक मेडिकल स्टोर के लाइसेंस
- 315 हैं खुदरा मेडिकल स्टोर के लाइसेंस
समय-समय पर मेडिकल स्टोर पर निरीक्षण भी किया जाता है। वहीं अगर कोई शिकायत आती है। तो जांच कर कार्रवाई की जाती है। वैसे सभी मेडिकल स्टोर के पास लाइसेंस है। लेकिन उसके बाद भी अगर कोई बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर संचालित कर है तो जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी।
- अनुभव शर्मा, औषधि निरीक्षक, धौलपुर
Published on:
15 Dec 2023 06:03 pm
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