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Rajasthan : आखिरकार अपने घायल बेटे को बेबस पिता ने हथठेला से पहुंचाया अस्पताल, जानें क्यूं अपनाना पड़ा यह तरीका

Rajasthan News : राजस्थान के धौलपुर की एक घटना में पीड़ित की बेबसी को देखकर आपकी आंखों में आंसू जा जाएंगे। एम्बुलेंस का इंतजार कर जब पिता थक गया तो वह अपने घायल व बीमार बेटे को हथठेले पर चिकित्सालय लेकर पहुंचा। पढ़िए सरकार के बेहतर चिकित्सा सुविधा का काला सच।

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Rajasthan Dholpur Finally Father Took His Injured Son to Hospital on a Handcart know why this method had to be adopted

आखिरकार अपने घायल बेटे को पिता ने हथठेला से पहुंचाया अस्पताल

Rajasthan News : राजस्थान के धौलपुर की एक घटना में पीड़ित की बेबसी को देखकर आपकी आंखों में आंसू जा जाएंगे। एक ओर राज्य सरकार जहां बेहतर चिकित्सा सुविधा और एम्बुलेंस सेवाओं का दावा कर रही है। वहीं उसकी जमीनी हकीकत इससे उलट है। एम्बुलेंस के देर से पहुंचती या न पहुंचने से कई बार पीड़ित का जीवन संकट में आ जाता है। ऐसा ही एक मामला मंगलवार देर शाम सामने आया हैं जहां एक घायल व बीमार युवक को आधा घंटे तक एम्बुलेंस के न आने पर पिता ने हथठेले पर बेटे को लादा और चिकित्सालय पहुंचा। जिसके बाद उसे अस्पताल में उपचार मिला।

काफी मिन्नतों के बाद भी नहीं आई एम्बुलेंस

राजाखेड़ा निवासी मोनू गुप्ता पुत्र मिट्ठनलाल लगभग मंगलवार देर रात बाजार से होकर निकल रहा था अचानक उनको दौरा पड़ा और वे एक पत्थर पर गिर गए। जिससे उनके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और उनको खून निकलने लगा। तेज आवाज सुनकर व्यापारी विष्णु गुप्ता सहित अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे। लोगों ने एम्बुलेंस को फोन किया। पर उधर से कोई जवाब नहीं मिला। जिसके बाद उपेंद्र गोस्वामी भी वहां पहुंचे और 108 सहित चिकित्सा विभाग के अन्य लोगों को फोन किया। इस दौरान 108 की उपलब्धता न बताते हुए उसकी मरम्मत और मरम्मत के नाम पर धौलपुर जाना बताया गया।

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हथठेला पर बेटे को ले गए अस्पताल

उधर घायल मोनू की हालात बिगड़ रही थी। थकहार कर तब स्थानीय व्यापारियों के सहयोग से घायल के पिता ने बाजार में खड़े हथठेला पर ही मोनू को लिटाकर खुद ही खींचते हुए चिकित्सालय पहुंचे। जहां उसका इलाज शुरू हुआ।

तीन एम्बुलेंस फिर भी हथठेले पर अटकी रही जान

उपखंड मुख्यालय पर 104 जननी सुरक्षा, 108 एम्बुलेंस और एक पेड़ एम्बुलेंस उपलब्ध है। फिर भी व्यापारी पुत्र की जान बचाने के लिए एम्बुलेंस न आने पर व्यापारियों व आमजन में काफी नाराजगी ओर आक्रोश है। व्यापारी पंकज जैन, दुष्यंत जैन, गौरव एसत्यम, भोला, दीपक ने कहा कि अगर 108 मेंटिनेंस के लिए बाहर गयी थी तो आपात स्थिति में 104 व अन्य पेड एम्बुलेंस को भी इस्तेमाल किया जा सकता था। आखिर यह महकमा कब संवेदनशील होगा। उधर, प्रशासन ने अभी तक मामले में कोई सुध नहीं ली है।

एम्बुलेंस न आना बेहद गंभीर मामला - व्यापारी उपेंद्र गोस्वामी

व्यापारी उपेंद्र गोस्वामी ने कहा मैं जब पहुंचा तब विष्णु गुप्ता और आबिद खान के सहयोग से घायल के रक्तस्राव को रोकने के लिए कपड़े की पट्टियां बांधकर उसकी जान बचाने का प्रयास कर रहे थे। एम्बुलेंस न आना बेहद गंभीर मामला है।

व्यापारी दुष्यंत जैन ने दागा सवाल

व्यापारी दुष्यंत जैन ने बताया कि राजाखेड़ा बड़ा क्षेत्र है जहां मुयालय पर ही एबुलेंस ना होने से लोगों का जीवन संकट में आ जाता है। खराब एम्बुलेंस के बदले दूसरी एम्बुलेंस क्यों नहीं भेजी गई।

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