
मनीष उपाध्याय
Dholpur News : राजाखेड़ा. राज्य सरकार शिक्षा को पहली प्रथमिकता बता रही है और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावे किए जा रहे हैं। वहीं जमीनी हालात बिल्कुल इसके उलट हैं। खासतौर से शहरी क्षेत्र में तो सरकारी विद्यालय अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अधिकांश शिक्षक विहीन हैं। ये हालात नए नहीं हैं और न ही अचानक बने हैं। बल्कि कई वर्षों से है लेकिन विभागीय असफलता और उदासीनता के चलते इनका कोई हल नहीं निकल पाया। विभाग में प्रभावशाली अध्यापकों ने इस आपदा में भी अवसर देखा और अधिकारियों से मिलीभगत कर घरों के नजदीक स्थित इन विद्यालयों में पोस्टिंग करवा रखी है।
लेकिन इसके बाद भी ये इन स्कूलों में कभी-कभार दिखते हैं। जिससे शिक्षा ढर्रा लगातार गिर रहा है। उपखंड़ मुख्यालय पर शहरी क्षेत्र में कुल 13 विद्यालय हैं। जिनमें 8 तो पूर्णत: शिक्षक विहीन हैं। जबकि दो महात्मा गांधी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी से अभी तक कक्षा 11 व 12 वीं कक्षा संचालित ही नहीं हो पा रही है। बालिका विद्यालय से अदूरदर्शिता पूर्ण नीतियों के चलते पहले ही एक प्राध्यापक के भरोसे चल रही है। बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की 4 अध्यापिकाओं को एक साथ अन्य विद्यालयों में लगा दिया। जिससे 500 बेटियों के भविष्य के शैक्षणिक भविष्य के लिए खतरा बना हुआ है।
अब अन्य विद्यालयों ने भी खोला मोर्चा
इन शिक्षक विहीन विद्यालयों के संचालन की खानापूर्ति के लिए विभाग ने शहरी क्षेत्र के शेष 5 बड़े विद्यालयों से अध्यापकों को बिना किसी योजना के ही इन विद्यालयों में भेज दिया है। जिसके कारण बड़े विद्यालयों में व्यवस्था बाधित होने लगी और बालिका विद्यालय के बाद अब राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गढ़ी चिंतामणि के अध्यापकों ने भी शिक्षा विभाग के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। अध्यापक योगेंद्र वर्मा ने बताया कि वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद हमने विद्यालय पर लोगों का भरोसा जमाया, अब हमें इन अनुत्पादक विद्यालयों में लगाकर छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
कहीं घी घना कहीं मुट्ठी भर चना जैसे हालात
शिक्षा विभाग की लापरवाही इस हद तक है कि राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सिंघावली खुर्द में मात्र 151 के नामांकन पर 11 अध्यापकों की तैनात हैं। वहीं राजाखेड़ा के राजकीय बालिका विद्यालय में 500 छात्राओं के लिए मात्र 4 अध्यापिकाएं ही बची हैं। वहीं, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गढी चिंतामणि में कुल 20 पदों में से 10 पद रिक्त है। यहां से दो शिक्षक अन्यत्र भेज दिया। जबकि यहां 350 से अधिक का नामांकन है। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भी 41 में से मात्र 19 पदों पर ही अध्यापक और अन्य कार्मिक उपलब्ध हैं। महात्मा गांधी बेसिक राजाखेड़ा में तो अध्यापकों की कमी से कक्षा 11 व 12 वीं संचालित ही नहीं हो रही।
'वास्तव में ही भारी विसंगति है। जब भी भर्तियां हुई ग्रामीण क्षेत्रों में की गई। शहरी क्षेत्र वंचित रहे। अब कार्यव्यवस्था खत्म हुई तो उससे हालात और बिगड़ गई। मामले में शिक्षा निदेशक से इजाजत लेकर अधिक संख्या वाले विद्यालयों के अध्यापकों को कम संख्या वाले विद्यालयों में लगाएंगे।' - चरण सिंह, कार्यवाहक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी
क्षेत्र में ये विद्यालय शिक्षक विहीन
शहरी क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय अंबरपुर वार्ड नंबर 2, प्राथमिक विद्यालय नयागांव, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय अंबरपुर, प्राथमिक विद्यालय गंगोलियापुरा, प्राथमिक विद्यालय भीमपुरा, प्राथमिक विद्यालय करीलकी, प्राथमिक विद्यालय भूतेश्वर, प्राथमिक विद्यालय गोपीनाथ में शिक्षक नहीं हैं।
Published on:
13 Jul 2024 06:58 pm
