
धौलपुर शहर के बीच से निकल रहे नेशनल हाईवे से गुजरते वाहन। फोटो: पत्रिका
धौलपुर। राज्य सरकार ने यातायात सुधार को लेकर पूर्व के बजट में 10 शहरों में बाईपास परियोजनाओं की घोषणा की थी लेकिन दो साल के बाद भी अभी तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर पेच अटका हुआ है। वजह भूमि अवाप्ति के लिए भारी-भरकम मुआवजा राशि सरकार के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है।
सरकार के खजाने पर जोर नहीं पड़े, इसके लिए मुआवजे के बदले भूमि देने पर निर्णय हुआ। यानी जमीन के बदले जमीन मिलेगी। लेकिन समस्या यह है कि शहरी क्षेत्र में करोड़ों रुपए की भूमि छोड़ने के बाद भूमि मालिक को सरकार जो भूमि देगी, उसकी वैल्यू पर सवाल खड़े हो रहे है। साथ ही भूमि किस जगह मिलेगी। इसको लेकर मुश्किलें आ सकती है। जमीन डीएलसी दर पर ली जाएगी।
बाईपास परियोजना में धौलपुर के साथ जयपुर, भरतपुर और सीकर जैसे दस बड़े शहर शामिल हैं। फिलहाल बाईपास परियोजनाओं को गति से देने से पहले वैकल्पिक जमीन तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। धौलपुर शहर के दोनों बाईपास के लिए करीब 29 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। राज्य सरकार ने बजट 2024-25 में धौलपुर के लिए दो नए बाईपास की धौलपुर घोषणा की थी। जिससे शहर में बढ़ रहे ट्रैफिक दवाब को कम किया जा सके।
उधर, प्रदेश के भीलवाड़ा जिले के उपखंड हमीरगढ़ क्षेत्र में सबलपुरा से मंगरोप बाईपास पीरियोजना के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि, एक बाईपास को एनएचएआई को देने से सरकार का भार कम होगा। लेकिन जमीन तो नगर परिषद् को उपलब्ध करवानी होगी, जो मुश्किल भरा काम है।
शहर के बाहरी इलाके में बनने वाले दोनों बाईपास तीन राष्ट्रीय राजमार्गों के ट्रैफिक को संभालने में महत्ती भूमिका निभाएंगे। इसमें पहला बाईपास एनएच 123 (धौलपुर-भरतपुर) से एनएच 11 बी (धौलपुर लालसोट) को जोड़ेगा। इससे जयपुर और भरतपुर की तरफ से आने वाला ट्रेफिक जो विशेष कर करौली की तरफ जाना है, वह इस बाईपास से गुजर सकेगा। इसी तरह दूसरा बाईपास एनएच 44 (आगरा-मुंबई हाइवे) से स्टेट हाइवे 2ए (धौलपुर-राजाखेड़ा) को कनेक्ट करेगा। इससे राजाखेड़ा की तरफ जाने वाला ट्रैफिक ट्रैफि शहर में बिना घुसे बाहर से निकल सकेगा। दोनों परियोजना पर करीब 286 करोड़ से अधिक की लागत आनी है।
बजट में इन बाईपास परियोजनों के लिए बजट घोषणा हो चुकी है। इसमें एनएच 123 से एनएच 11बी को जोड़ने वाले बाईपास के लिए करीब 154.64 करोड़ रुपए और दूसरे बाईपास एनएच 44 से स्टेट हाइवे 2ए को कनेक्ट करने के लिए 131.70 करोड़ रुपए सड़क निर्माण पर खर्च होंगे। इस बाईपास के निर्माण से शहरवासियों को अनावश्यक ट्रैफिक समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। साथ ही बाईपास से नए क्षेत्र के लिए यातायात बेहतर हो सकेगा।
धौलपुर उपखंड क्षेत्र में बनने वाले दोनों बाईपास क्षेत्र के लिए करीब 29 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। सूत्रों के अनुसार सरकार से प्रशासन के पहला प्रस्ताव आ गया है। हालांकि, अभी तक इस पर किसी तरह की एक्साइज नहीं हुई है। वहीं, सरकार इस दफा भूमि के बदले भूमि देने पर मंथन कर रही है। यानी भूमि अवाप्ति के बदले पैसे नहीं मिलेंगे। जैसा ही अमूमन होता रहा है। इसकी वजह सरकार के पास बजट की कमी होना बताया जा रहा है। सरकार इन बाईपास परियोजनाओं को लेकर बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर भी विचार कर रही है।
उधर, सार्वजनिक निर्माण विभाग एनएच 123 से एनएच 11बी को जोड़ने वाले बाईपास को एनएचएआई को सौंपने पर विचार कर रहा है। इसको लेकर डीपीआर कंसलटेंट देंगे। जिस पर फानइल मोहर लगेगी। इसकी वजह एनएचएआई एजेंसी को यहां पर कार्य करने में आसानी रहेगी। साथ ही एनएचएआई यहां बाईपास पर टोल लगा कर लागत भी वसूल सकती है। अब केवल नगर परिषद और उपखंड प्रशासन को बाईपास के लिए जमीन तलाश करके देनी होगी।
देश के सबसे लम्बे राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 (आगरा-मुंबई) पर प्रतिदिन औसतन करीब 50 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। यह हाइवे के कुछ प्रमुख और व्यस्त हिस्सों का है। इसका आकलन साल 2022 में एक डेटा रिपोर्ट आधारित है। हालांकि, हाइवे पर विभिन्न हिस्सों में ट्रेफिक सघनता अलग-अलग है। हाइवे पर सर्वे में प्रतिघंटे से 3 हजार से अधिक वाहन गुजरना रेकॉर्ड हुआ।
दोनों बाईपास निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए नगर परिषद प्रशासन को लिखा है। जमीन नगर परिषद प्रशासन देनी है। जिसके बाद ही आगे की प्रक्रिया होगी। दो एनएच को जोडने वाले बाईपास को एनएचएआई को देने पर विचार हो रहा है। यह परियोजना पूरी तरह से जमीन के बदले जमीन पर है। प्रोजेक्ट को जो जमीन मिलेगी, उसी डीएलसी रेट दी जाएगी।
-मधुसूदन राव, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी धौलपुर
Published on:
26 Apr 2026 03:09 pm
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