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डूंगरपुर। आसपुर क्षेत्र के गोल गांव सोम नदी घाट पर हालात ऐसे हैं कि मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार करना भी आसान नहीं रह गया है। श्मशान घाट पूरी तरह दलदली जमीन और कंटीली झाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां तक शव लेकर पहुंचना और अंतिम संस्कार करना लोगों के लिए बेहद कठिन और जोखिम भरा हो गया है।
गोल गांव सोम नदी के तट पर बसा हुआ है। नदी के किनारे करीब 300 मीटर का पूरा तटबंध श्मशान घाट के लिए आरक्षित है। लेकिन यह इलाका सालभर पानी से भरा रहता है। आसपास के खेतों से रिसने वाला नहरी पानी, पहाड़ी से उतरने वाला बरसाती पानी और बस्तियों से निकलने वाला गंदा पानी यहां जमा हो जाता है। इसके कारण जमीन दलदली बन गई है और चारों तरफ झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। ऐसे में अर्थी लेकर चलना काफी मुश्किल भरा काम हो गया है। कब पैर फिसल जाएं और कब कांटे चुभ जाएं किसी को नहीं पता।
इस तटबंध पर पहले से चार श्मशान घाट बने हुए हैं। करीब 25 साल पहले यहां टीन शेड और लोहे के एंगल से बना एक श्मशान घाट भी था, लेकिन वर्ष 2006 की सोम नदी की बाढ़ में वह पूरी तरह नष्ट हो गया। इसके बाद न तो उसका पुनर्निर्माण हुआ और न ही नए श्मशान घाट बनाए गए। मजबूरी में ग्रामीणों को आज भी दलदल भरी जमीन पर ही शवों का दाह संस्कार करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने पिछले दस वर्षों में कई बार प्रशासनिक शिविरों, ग्राम सभाओं और सरकारी कार्यक्रमों में इस समस्या को उठाया, लेकिन अब तक कोई ठोस योजना नहीं बन पाई। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो दिन पहले एक वृद्धा के अंतिम संस्कार के दौरान दलदल में फिसलने से सात लोग घायल हो गए।
ग्रामीणों की मांग है कि सोम नदी के तटबंध को पक्का किया जाए, झाड़-झंखाड़ हटाए जाएं और आधुनिक सुविधाओं से युक्त मोक्षधाम का निर्माण हो। इसमें श्मशान घाट, टीन शेड, पानी की व्यवस्था, स्टोर रूम और परिसर का सौंदर्यीकरण शामिल हो। सरपंच गौतमलाल मीणा का कहना है कि यदि सरकार, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मिलकर प्रयास करें, तो यह काम संभव है और क्षेत्र का एक आदर्श मोक्षधाम बन सकता है।
Published on:
02 Jan 2026 05:51 pm
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