
डूंगरपुर में दिशांत पटेल व ईश्वर पाटीदार। फोटो पत्रिका
RBSE 10th Result 2026 : राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की ओर से घोषित दसवीं बोर्ड के परीक्षा परिणाम में रामगढ़ एक्सीलेंट स्कूल के ईश्वर पाटीदार व वागड़ विद्या विहार फलोज के छात्र दिशांत पटेल ने 99.50 प्रतिशत अंक हासिल किए। दोनों सफल परीक्षार्थियों ने बताएं अपनी सफलता के गुर।
वागड़ विद्या विहार उच्च माध्यमिक विद्यालय, फलोज के छात्र दिशांत पटेल ने 99.50 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। मूलतः ऊपरगांव निवासी दिशांत के पिता महेश पटेल सरकारी स्कूल में वरिष्ठ अध्यापक हैं, लेकिन घर पर दिशांत की पढ़ाई का मोर्चा उनकी दादी कमला देवी और मां जशोदा देवी ने संभाल रखा था।
दादी कमला देवी पोते के साथ कमरे में बैठकर उसकी पढ़ाई पर नजर रखती थीं और सुबह जल्दी जगाने से लेकर किताबों के रखरखाव तक की जिम्मेदारी निभाती थीं। घर के कामों के बीच मां जशोदा देवी ने यह सुनिश्चित किया कि दिशांत का पूरा ध्यान केवल अध्ययन पर रहे।
दिशांत ने अपनी सफलता का श्रेय स्कूल के प्रशासक निलेश उपाध्याय के अनुभव और प्रधानाचार्य राजेश जोशी के परीक्षा पूर्व मार्गदर्शन को दिया है। बोर्ड प्रभारी हरिशचन्द्र डेण्डोर ने हिंदी और अंग्रेजी विषयों में विशेष टिप्स दिए। स्कूल में उत्तर लिखने के तरीके और समय सीमा के भीतर पेपर हल करने के अभ्यास ने परीक्षा में काफी मदद की। दिशांत का लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाने का हैं।
जहां आज की पीढ़ी का अधिकांश समय स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर बीतता है, वहीं सकानी गांव के ईश्वर पाटीदार ने मिसाल कायम की है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर के बेटे होने के बावजूद ईश्वर ने आज तक मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया और मेहनत के दम पर 10वीं बोर्ड परीक्षा में 99.50 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। जब दसवीं का परिणाम घोषित हुआ तब ईश्वर किसी आलीशान कमरे में नहीं, बल्कि तपती धूप में अपने परिवार के साथ खेतों में गेहूं की कटाई कर रहे थे।
एक्सीलेंट स्कूल के निदेशक मुकेश जैन से मिली सूचना के बाद जब मां मोगीदेवी खेत पर पहुंची और बेटे को उसके परीक्षा परिणाम के बारे में बताया, तो पूरे परिवार की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। ईश्वर के पिता, गोकुलराम पाटीदार, अहमदाबाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। घर में तकनीक की समझ होने के बावजूद ईश्वर ने पढ़ाई के दौरान खुद को मोबाइल से पूरी तरह दूर रखा।
ईश्वर ने बताया कि वे प्रतिदिन 4 से 5 घंटे का स्वाध्याय करते थे। स्कूल निदेशक मुकेश जैन की ओर से नोट्स और साप्ताहिक टेस्ट के जरिए लगातार मूल्यांकन एवं जिन विषयों में नंबर कम आते, उन पर मार्गदर्शन दिया जाता था। वे कहते है कि लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का हैं।
Updated on:
25 Mar 2026 09:55 am
Published on:
25 Mar 2026 09:51 am
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