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सरकारी नर्सिंग हॉस्टल में आदिवासी छात्रा की मौत से पहले प्राचार्य ने क्यों लिखा केयर टेकर के लिए 11 बार पत्र आप भी जरूर पढ़े

जिला अस्पताल परिसर में संचालित जनरल नर्सिंग प्रक्षिण केन्द्र अव्यवस्थाओं का केन्द्र बन चुका है। पिछले एक वर्ष से हास्टल बिना केयर टेकर के चल रहा है।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Dec 14, 2017

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दुर्ग . जिला अस्पताल परिसर में संचालित जनरल नर्सिंग प्रक्षिण केन्द्र अव्यवस्थाओं का केन्द्र बन चुका है। पिछले एक वर्ष से हास्टल बिना केयर टेकर के चल रहा है। प्रशिक्षण केन्द्र की प्राचार्य ने एक वर्ष में ग्यारह बार संचानालय को पत्र लिखा। इसके बाद भी अब तक पूर्णकालिक तो क्या प्रभारी केयर टेकर नियुक्ति नहीं किया गया।

शैक्षिणक हो या फिर प्रशिक्षण केन्द्र के छात्रावास में अधीक्षक या फिर केयर टेकर का पद शासन ने अनिवार्य किया है। खास तौर पर ऐसे संस्थान में जहां पर छात्राएं रहती है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित जनरल नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र अक्टूबर २०१६ से खाली है।

व्यवस्था के तहत इस पद पर जिला अस्पताल प्रशासन ने स्टाफ नर्स को प्रभार सौंपा था। स्टाफ नर्स सरस्वती ताम्रकार के सेवा निवृत्त होने के बाद यह पद खाली है। महत्वपूर्ण पद रिक्त होने के कारण संस्था की प्राचार्य ने लगभग ११ बार पत्र लिखा है। इसके बाद भी अब तक किसी की नियुक्ति नहीं की गई है।

केयर टेकर का कार्य
हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं की समस्याओं को दूर करने के लिए केयर टेकर पद स्वीकृत है। हास्टल की संपूर्ण जिम्मेदारी भी केयर टेकर पर है। रहने व खाने की व्यवस्था की जिम्मेदारी के अलावा मेल मुलाकात करने वालों पर नजर रखना है। केयर टेकर को स्थाई रुप से हास्टल में ही रहना है।

यह है समस्या
वर्ष१९८० से केयर टेकर का पद स्वीकृत है, लेकिन हॉस्टल में केयर टेकर के लिए आवासा या फिर अतिरिक्त कक्ष नहीं है। यही कारण है कि के यर टेकर का प्रभारी पद लेने से स्टाफ नर्स संकोच करती हैं। प्रशिक्षण केन्द्र, हास्टल की जिम्मेदारी सिविल सर्जन पर है। प्रशिक्षण लेने वाली छात्राओं को शिफ्टवार जिला अस्पताल में ड्यूटी भी लगाई जाती है।

शासन से आदेश नहीं
सिविल सर्जन डॉ. केके जैन ने बताया कि अब तक प्रशिक्षण केन्द्र में संचानालय के आदेश पर हम जिला अस्पताल के स्टाफ नर्स को प्रभार देते आए हैं। प्राचार्य ने अवश्य पत्राचार किया है, लेकिन शासन स्तर पर किसी तरह का आदेश नहीं आने के कारण हम वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं कर पा रहे है।