
प्राचार्य पर 50 हजार का जुर्माना लगाया (photo source- Patrika)
CG News: दुर्ग जिले के नंदिनी थाना क्षेत्र में स्थित मदर टेरेसा इंग्लिश मीडियम स्कूल में नर्सरी की एक मासूम बच्ची के साथ हुई कथित मारपीट के मामले में अब शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। करीब साढ़े तीन साल की बच्ची से अमानवीय व्यवहार के इस मामले में स्कूल की प्राचार्य ईला ईवन कौलविन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है।
यह घटना जुलाई 2025 की बताई जा रही है। आरोप है कि नर्सरी में पढ़ने वाली बच्ची ने स्कूल में “राधे-राधे” कहा, जिससे प्राचार्य नाराज हो गईं। इसके बाद उन्होंने बच्ची को डांटा-फटकारा ही नहीं, बल्कि कथित तौर पर उसके साथ मारपीट भी की और उसके मुंह पर टेप चिपका दिया।
जब बच्ची घर पहुंची तो वह डरी-सहमी हुई थी। परिजनों के पूछने पर उसने पूरी घटना बताई, जिसके बाद परिवार में आक्रोश फैल गया। बच्ची के पिता प्रवीण यादव ने तुरंत नंदिनी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राचार्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के साथ-साथ किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत भी कार्रवाई की गई। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई।
घटना के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की विस्तृत जांच की। लंबी प्रक्रिया के बाद विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार का मामला मानते हुए प्राचार्य पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। स्वयं प्राचार्य ने इस कार्रवाई की पुष्टि भी की है।
मामला उस समय और ज्यादा चर्चा में आ गया, जब इस घटना का विरोध करने वाली एक राजनीतिक पार्टी ने बाद में उसी प्राचार्य को अपने संगठन में जिला स्तर का पद दे दिया। इस फैसले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी और सवाल दोनों सामने आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक ओर घटना का विरोध और दूसरी ओर जिम्मेदार व्यक्ति को पद देना विरोधाभासी है।
घटना के बाद से ही स्थानीय लोगों और अभिभावकों में गुस्सा बना हुआ है। उनका कहना है कि इतनी छोटी बच्ची के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद अमानवीय है और इसे केवल अनुशासनात्मक मामला नहीं, बल्कि मानसिक प्रताड़ना के रूप में देखा जाना चाहिए। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि स्कूलों में बच्चों के साथ संवेदनशील और सकारात्मक व्यवहार बेहद जरूरी है, खासकर नर्सरी स्तर पर, जहां बच्चे सीखने के शुरुआती दौर में होते हैं।
Updated on:
27 Mar 2026 09:38 am
Published on:
27 Mar 2026 09:37 am
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