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ये है छत्तीसगढ़ की पैड वुमन अमिता कुमार, जिन्होंने मैटर्निटी पैड बनाने के लिए खुद एसेंबल की अल्ट्रा वायलेट मशीन, महिलाओं को दिया रोजगार

प्रदेश में पोस्टपार्टम पैड्स बन जाएं, इसके विषय में कम ही लोगों ने सोचा होगा। इस क्षेत्र में कदम रखने वाली पहली महिला बोरसी की अमिता कुमार है।

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दुर्ग

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Dakshi Sahu

Nov 24, 2021

ये है छत्तीसगढ़ की पैड वुमन अमिता कुमार, जिन्होंने मैटर्निटी पैड बनाने के लिए खुद एसेंबल की अल्ट्रा वायलेट मशीन, महिलाओं को दिया रोजगार

ये है छत्तीसगढ़ की पैड वुमन अमिता कुमार, जिन्होंने मैटर्निटी पैड बनाने के लिए खुद एसेंबल की अल्ट्रा वायलेट मशीन, महिलाओं को दिया रोजगार

दुर्ग. मैटर्निटी पैड्स अथवा पोस्टपार्टम पैड्स के बारे में सामान्यत: कम ही लोगों ने सुना है। डिलीवरी के वक्त अत्याधिक ब्लीडिंग होने की वजह से यह पैड्स इस्तेमाल किए जाते हैं। प्रदेश में पोस्टपार्टम पैड्स बन जाएं, इसके विषय में कम ही लोगों ने सोचा होगा। इस क्षेत्र में कदम रखने वाली पहली महिला बोरसी की अमिता कुमार है। उन्हें लगा कि वुमन हाइजिन सेगमेंट में कार्य करना चाहिए। गांधीग्राम इंस्टीट्यूट में सीखे तकनीकी ज्ञान की मदद से उन्होंने मैटर्निटी पैड बनाने अल्ट्रा वायलेट मशीन खुद एसेंबल खुद कर ली। अंत्यावसायी निगम से 6 लाख रुपए का लोन लिया और इसका सेटअप डाल दिया। अमिता कुमारअपने साथ ही चार और महिलाओं को भी रोजगार दे रहीं हैं।

पहले बनाती थीं सेनेटरी पैड्स
अमिता कुमार बताती हैं कि एक एनजीओ के प्रस्ताव पर अंबागढ़ में सेनेटरी पैड का पहला प्रोजेक्ट शुरू किया। इसके बाद मैटर्निटी पैड्स पर काम किया। अभी उनके प्रोडक्ट शासकीय अस्पतालों और प्राइवेट संस्थाओं में जा रहे हैं। प्रदेश में पाटन, धरसींवा और तिल्दा में भी उनका मैटर्निटी पैड जाता है। उनके द्वारा प्रति महीने लगभग 7 हजार पेट्स का निर्माण किया जा रहा है।

उम्र कभी भी नहीं बनी बाधा
सही मायने में किसी भी गृहणी का जीवन अर्ध शतक लगाने के बाद ही शुरू होता है, जहां उसके बच्चे पढ़ लिखकर बड़े हो जाते हैं। यहां से अमिता ने भी अपने कुमार गु्रप की शुरुआत की। उन्होंने अपने बेटे अनंश कुमार के नाम से जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति से 6 लाख रुपए का लोन लिया और यह कार्य आरंभ किया।

महिला उत्थान के साथ रोजगार भी
उनकी संस्था में 5 महिलाएं कार्य कर रही है। संस्था में काम करने वाली इंदु ने बताया कि एक दूसरे के माध्यम से ही वे संस्था में आई है और धीरे-धीरे संस्था में एक चैन बनती चली जा रही है। नीलम ने बताया कि अमिता शिक्षा के लिए भी उन्हें बढ़ावा देती हैं, उनके द्वारा दी गई सैलरी से ही उन्होंने मोबाइल फोन भी खरीदा है। जिसे वो लॉक डाउन के समय में अपने पढ़ाई के उपयोग में लाती थी।

रियल पेडमैन से मिल चुकी हैं अमिता
अमिता ने बताया कि अपनी ट्रेनिंग के दौरान वो कोयंबटूर में सेनेटरी पैड पर यूनिट देखने के लिए गई थीं जहां उनकी मुलाकात रियल पेडमैन अरुणाचलम मुरूगनंतम से हुई और यह उनके लिए जीवन की दिशा बदलने वाला पल था। एक पुरुष प्रधान देश में उन्हें एक ऐसा पुरुष मिला था जो महिलाओं के बारे में सोच रहा था। अमिता ने उनसे भविष्य के लिए टिप्स भी लिए।