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कोरोना वायरस से लड़ने को अमीरों पर लगाया जा सकता है 40 फीसदी टैक्स

आईआरएस एसोसिएशन ने सीबीडीटी को सौंपे कई तरह के सुझाव सुझाव में एक करोड़ से ज्यादा कमाई करने वालों पर लगे 40 फीसदी टैक्स विदेशी कंपनियों पर सरचार्ज बढ़ाने का भी दिया गया है सुझाव

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Saurabh Sharma

Apr 26, 2020

40 pc tax can be imposed on Super rich to fight against coronavirus

40 pc tax can be imposed on Super rich to fight against coronavirus

नई दिल्ली। कोरोना वायरस लॉकडाउन ( Coronavirus Lockdown ) के दौरान देश की इकोनॉमी में लगातार खोखलापन देखने को मिल रहा है। अर्थव्यवस्था में आए गड्ढों को भरने के लिए सरकार के पास मौजूदा समय पर्याप्त लिक्विडिटी भी नहीं है। ऐसे में कोरोना वायरस से लडऩे के लिए देश के कई टैक्स ऑफिसर्स ( Tax Officers ) की ओर से सुझाव दिया गया गया है कि देश में मौजूद सुपर रिच ( Super Rich Tax Surcharge ) लोगों पर 40 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा। साथ ही विदेशी कंपनियों पर सरचार्ज बढ़ाने और वेल्थ टैक्स बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। वास्तव में इंडियन रेवेन्यू सर्विस एसोसिएशन ( Indian Revenue Service Association ) की ओर से सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस ( Central Board of Direct Taxes ) को FORCE यानी Fiscal Option and Response to the Covid-19 Epidemic के नाम से यह प्रस्ताव दिया गया है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इस FORCE में ऐसा क्या है...

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FORCE में दिए गए सुझाव
- सरकार सिर्फ ईमानदार टैक्सपेयर्स को ही राहत दे।
- 30 जून 2021 तक मौजूदा महंगाई भत्ते को ही रखे। केंद्र सरकार के 37 हजार करोड़ रुपए बचेंगे।
- 1 करोड़ से ज्यादा इनकम वालों पर 30 की जगह 40 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा।
- 5 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर वेल्थ टैक्स लागू किया जाए।
- बजट 2020-21 में सुपर रिच पर सरचार्ज लागू किया गया था, जिससे 2700 करोड़ रुपए की कमाई होती।
- विदेशी कंपनियों पर 9 से 12 महीनों के लिए सरचार्ज बढ़ाने की बात कही गई है।
- मौजूदा समय में विदेशी कंपनियों पर 1 से 10 करोड़ कमाई पर सरचार्ज 2 फीसदी और 10 करोड़ से ज्यादा कमाई पर 5 फीसदी सरचार्ज लगाया जाता है।
- फाइनेंस कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 'कोविड रिलीफ सेसÓ वसूलने का सुझाव दिया है।
- कोविड रिलीफ सेस से 15 से 18 हजार करोड़ रुपए वसूले जा सकते हैं।

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केयर रेटिंग की रिपोर्ट इकोनॉमी गिराई
केयर रेटिंग की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2021 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 1.1 फीसदी से 1.2 फीसदी के रहने की संभावना है। जिसमें और भी गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि इकोनॉमी को सरकार और एग्रीकल्चर सेक्टर से मदद मिल सकती है, लेकिन इसके विपरीत बाकी सेक्टर बड़ा दबाव कायम रहने की संभावना है। केसर रेटिंग की रिपोर्ट की मानें तो मौजूदा वित्त वर्ष में माइनिंग, मैन्यूफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में कमजोरी की संभावनाएं बन रही है। वहीं दूसरी ओर फाइनेंशियल सर्विसेस, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेस में 0.5 फीसदी का इजाफा देखने को मिल सकता है। वहीं देश की अर्थव्यवस्था को डिमांड और इंप्लोयमेंट के मामले में काफी चैलेंजिस देखने को मिल सकते हैं।