
Assocham की चेतावनी, ट्रक ऑपरेटर्स और ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल से होगा 25 हजार करोड़ का नुकसान
नई दिल्ली। आज से यानि 20 जुलार्इ से पूरे देश में ट्रक ऑपरेटर्स और ट्रांसपोर्टर्स की बेमियादी हड़ताल शुरू हो गर्इ हैं। जिस पर इंडस्ट्रीयल बॉडी एसोचैम ने बड़ी चेतावनी जारी की है। एसोचैम की मानें अगर देश में इस इस हड़ताल को खत्म नहीं किया गया तो देश की इकोनाॅमी को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। एसोचैम ने सरकार से अपील करते हुए कहा है कि जल्द से जल्द इस हड़ताल को खत्म कराए।
ये है एसोचैम की चेतावनी
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने बयान जारी करते हुए कहा है कि एआईटीएमसी को यह हड़ताल वापस ले लेनी चाहिए या सरकार को इस मामले में दखल देना चाहिए। उनका मानना है कि इस हड़ताल के थोक सेल प्राइस इंडेक्स और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स बुरी तरह से प्रभावित होगा और जरूरी चीजों के दाम बढ़ जाएंगे। एसोचैम का अनुमान है कि इस हड़ताल की वजह से इकोनॉमी को 20 से 25 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।
हड़ताल में डेढ़ करोड़ वाहन शामिल
ट्रक और बस ऑपरेटर्स संगठन (एआईएमटीसी) ने दावा किया है कि शुक्रवार से शुरू हुई हड़ताल में लगभग 90 लाख ट्रक और 50 लाख बस मालिक शामिल हैं। ये सभी वाहन चलने बंद हो गए हैं। जिससे देश की आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रकों की हड़ताल की वजह से खाने और पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। ट्रकों की रफ्तार पर ब्रेक लगने से रोजमर्रा के जरूरत की चीजों की कमी हो सकती है।
ये हैं सरकार के सामने मांगें
- ट्रक ऑपरेटर और ट्रांसपोर्टर लगातार डीजल की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार से अपील कर रहे हैं।
- डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए, ताकि उन्हें इसकी बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके।
- ऑपरेटर्स की मांग है कि टोल सिस्टम में भी बदलाव लाया जाए। टोल प्लाजा पर न सिर्फ उन्हें समय का नुकसान झेलना पड़ता है, बल्कि इससे उनका काफी मात्रा में ईंधन भी बरबाद होता है।
- ट्रक ऑपरेटर्स की मांग है कि उन्हें थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम पर लगने वाले जीएसटी में छूट दी जानी चाहिए।
Updated on:
21 Jul 2018 09:27 am
Published on:
20 Jul 2018 08:51 pm
