लोकसभा चुनाव से पहले 62 फीसदी बढ़ी चुनावी बांड की बिक्री, इन प्रमुख शहरों में सबसे अधिक बेचे गए बांड्स

लोकसभा चुनाव से पहले 62 फीसदी बढ़ी चुनावी बांड की बिक्री, इन प्रमुख शहरों में सबसे अधिक बेचे गए बांड्स

Ashutosh Kumar Verma | Publish: Apr, 01 2019 05:54:17 PM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

  • जनवरी के बाद से अब तक चुनावी बांड बिक्री में 62 फीसदी की आई तेजी।
  • वित्त मंत्रालय द्वारा किसी अवधि के लिए बिक्री की अधिसूचना जारी होने के बाद एसबीआई की शाखाओं के जरिये चुनावी बांड बेचा जाता है।
  • चुनावी बांड याजना को केंद्र सरकार ने 2018 में अधिसूचित किया था।

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले चुनावी बांड की बिक्री में 62 फीसदी का जोरदार उछाल आया है। सूचना का अधिकार ( RTI ) के तहत मांगी गई जानकारी से पता चलता है कि चुनावी बांड की बिक्री पिछले साल की तुलना में करीब 62 फीसदी बढ़ गई है। भारतीय स्टेट बैंक ( SBI ) ने 1,700 करोड़ रुपए से अधिक के चुनावी बांड बेचे हैं।


इस साल 1,716.05 करोड़ रुपए के बांड बेचे गए

पुणे के विहार दुर्वे द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में एसबीआई ने बताया कि 2018 में उसने मार्च, अप्रैल, मई, जुलाई, अक्टूबर और नवंबर के माह में 1,056.73 करोड़ रुपए के बांड बेचे। इस साल जनवरी और मार्च में बैंक ने 1,716.05 करोड़ रुपए के चुनावी बांड बेचे। इस तरह चुनावी बांड की बिक्री में 62 फीसदी का इजाफा हुआ। लोकसभा के चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होना है। वित्त मंत्रालय द्वारा किसी अवधि के लिए बिक्री की अधिसूचना जारी होने के बाद एसबीआई की शाखाओं के जरिये चुनावी बांड बेचा जाता है।


इन प्रमुख शहरों में बेचे गए सबसे अधिक बांड

एसबीआई द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 2019 में सबसे अधिक 495.60 करोड़ रुपए के चुनावी बांड मुंबई में बेचे गए। कोलकाता में 370.07 करोड़ रुपए, हैदराबाद में 290.50 करोड़ रुपए, दिल्ली में 205.92 करोड़ रुपए और भुवनेश्वर में 194 करोड़ रुपए के चुनावी बांड बेचे गए। चुनावी बांड याजना को केंद्र सरकार ने 2018 में अधिसूचित किया था। इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गइ।


क्या हैं चुनावी बांड के नियम

जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 29ए के तहत ऐसे राजनीतिक दल जिन्हें पिछले आम चुनाव या राज्य के विधानसभा चुनाव में एक फीसदी या उससे अधिक मत मिले हैं, चुनावी बांड प्राप्त करने के पात्र होते हैं। ये बांड 15 दिन के लिए वैध होते हैं और पात्र राजनीतिक दल इस अवधि में किसी अधिकृत बैंक में बैंक खाते के जरिये इन्हें भुना सकता है। चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाले स्वैच्छिक समूह एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) ने हाल में इन बांडों की बिक्री पर रोक की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय में अपील की है। माकपा ने अलग याचिका में इसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।

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