
रुपए में कमजाेरी से सौर परियोजनाआें को 28,000 करोड़ नुकसान होने का खतरा, क्रिसिल ने रिपोर्ट में किया दावा
नर्इ दिल्ली। डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत के कारण देश की करीब 28,000 करोड़ रुपये मूल्य की सौर परियोजनाआें के लिए खतरा पैदा हो गया है। इन परियोजनआें का क्रियान्वयन जारी तो है लेकिन उनके अव्यवहारिक होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। दरअसल रुपए में गिरावट से आयातित सोलर माॅड्यूल महंगे हो गए हैं जिसके बाद सौर संयंत्र की लागत बढ़ गई है। क्रिसिल द्वारा सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। इस रिपोर्ट में बताया गया कि जिन परियोजनाओं पर खतरा पैदा हुआ है।
अभी शुरुआती दौर में है परियोजनाएं
उनमें पिछले नौ महीनों में निविदा से हासिल की गई 5.5 गीगावाट की परियोजनाएं है। इन परियोजनआें का टैरिफ दर बहुत ही कम 2.75 रुपये प्रति यूनिट है। रिपोर्ट में कहा गया कि ये परियोजनाएं शुरुआती चरण में हैं और अभी सोलर मॉड्यूल आयात करने के चरण में हैं। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक सुबोध राय ने कहा, "सौर संयंत्र की कुल लागत का 55-60 फीसदी सोलर मॉड्यूल की लागत होती है, जो 5 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट होती है।"
30 लाख प्रति मेगावाट की बढ़ी लागत
उन्होंने कहा, "आज 90 फीसदी सोलर मॉड्यूल का आयात किया जा रहा है। हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि रुपये के मूल्य में हरेक 10 फीसदी की गिरावट के साथ ही सौर बिजली संयंत्र लगाने की लागत 30 लाख रुपये प्रति मेगावाट बढ़ जाती है। वो भी तब, जब दूसरी चीजों की लागत ना बढ़े।" उन्होंने कहा कि इससे सरकार के वित्तवर्ष 2022 तक 100 गीगावाट की सौर क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य प्रभावित होगा।
Updated on:
31 Oct 2018 08:41 am
Published on:
30 Oct 2018 08:02 pm
